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एक्सीडेंट के बाद भी शुभम ने टेबल टेनिस गोल्ड

खेल ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 3 January 2026

लुधियाना के शुभम ने हादसे में दोनों पैर खोने के बावजूद व्हीलचेयर पर टेबल टेनिस खेलकर गोल्ड मेडल जीता, तीन साल बिस्तर पर रहने के बाद रचा इतिहास।

मुनीश वशिष्ट, लुधियाना। कहते हैं हौसलों के आगे हालात भी हार मान लेते हैं। इस कहावत को सच कर दिखाया है पंजाब के लुधियाना निवासी शुभम ने, जिन्होंने एक गंभीर सड़क हादसे में अपने दोनों पैर गंवाने के बावजूद हार नहीं मानी और व्हीलचेयर पर बैठकर टेबल टेनिस में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

शुभम की जिंदगी कुछ साल पहले तक बिल्कुल सामान्य थी। पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी उनकी गहरी रुचि थी। लेकिन एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया। हादसे में शुभम के दोनों पैर काटने पड़े। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी जान बचाना ही उस समय सबसे बड़ी चुनौती थी। इस हादसे के बाद शुभम करीब तीन साल तक बिस्तर पर रहे। शारीरिक दर्द के साथ-साथ मानसिक संघर्ष भी कम नहीं था।

शुभम बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें लगता था कि अब जीवन खत्म हो गया है। लेकिन परिवार के सहयोग और खुद के मजबूत इरादों ने उन्हें दोबारा खड़ा होने की ताकत दी। व्हीलचेयर पर आने के बाद उन्होंने खुद को कमजोर मानने के बजाय नई राह तलाशने का फैसला किया। इसी दौरान उन्होंने पैरा टेबल टेनिस को गंभीरता से अपनाया।

शुरुआत आसान नहीं थी। रोजाना घंटों अभ्यास, गिरना-पड़ना और लगातार असफलताएं झेलनी पड़ीं। लेकिन शुभम ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने ऊपरी शरीर की ताकत और हाथों की गति पर खास ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनका खेल निखरता गया और वे जिला, राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे।

हाल ही में आयोजित एक राष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिता में शुभम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ लुधियाना, बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस कराया। गोल्ड जीतने के बाद शुभम भावुक हो गए और उन्होंने इसे अपने माता-पिता और कोच को समर्पित किया।

शुभम कहते हैं,
“मैं तीन साल तक बिस्तर पर रहा। उस वक्त लगता था कि जिंदगी खत्म हो गई है। लेकिन आज जब गोल्ड मेडल हाथ में है, तो महसूस होता है कि अगर हौसला हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।”

उनकी कहानी आज हजारों दिव्यांग और संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि शुभम जैसे खिलाड़ी यह साबित करते हैं कि शारीरिक अक्षमता कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

लुधियाना के खेल प्रेमियों और स्थानीय प्रशासन ने भी शुभम की इस उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की है। भविष्य में शुभम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और उनका सपना पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है।

शुभम की यह संघर्षपूर्ण लेकिन प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि गिरकर उठने का नाम ही असली जीत है।

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