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शोरूम मैनेजर लाखों लेकर फरार

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 26 July 2025

रायपुर में एक शोरूम मैनेजर ₹7.85 लाख लेकर फरार हो गया। वह पहले भी एक कंपनी को ठग चुका है। पुलिस ने मामला दर्ज किया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक शोरूम का मैनेजर लाखों रुपये लेकर फरार हो गया है। यह वही व्यक्ति है जो अपनी पिछली कंपनी को भी ठग चुका है। ताज्जुब की बात यह है कि वर्तमान कंपनी को उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी नहीं थी। जैसे ही घटना सामने आई, शोरूम मालिक ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना ने न केवल व्यापारियों को चौंका दिया है बल्कि सुरक्षा और कर्मचारी सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

📌 घटना का पूरा विवरण

घटना रायपुर के [स्थान] स्थित एक ऑटोमोबाइल शोरूम की है, जहां आरोपी [नाम] पिछले 8 महीनों से मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत था। कंपनी का भरोसेमंद समझा जाने वाला यह व्यक्ति कैश कलेक्शन, ग्राहकों की पेमेंट और बैंक डिपॉजिट की जिम्मेदारी देख रहा था।

बीते शुक्रवार को वह लाखों रुपये की नकदी लेकर बैंक जाने की बात कहकर निकला, लेकिन दिनभर उसके मोबाइल पर संपर्क नहीं हुआ। शाम तक जब वह नहीं लौटा, तो शोरूम मालिक को शक हुआ। बैंक जाकर पता किया गया तो मालूम चला कि पैसे जमा ही नहीं हुए।

🕵️‍♂️ पुराना इतिहास भी संदिग्ध निकला

जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी पहले भी एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में काम करता था, जहां से उसने तकरीबन 4 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर नौकरी छोड़ दी थी। उस कंपनी ने भी उसके खिलाफ केस दर्ज करवाया था, लेकिन वह फरार हो गया था और कुछ समय बाद पहचान बदलकर रायपुर आ गया।

नया नाम और नया नंबर लेकर उसने इस शोरूम में नौकरी जॉइन की और धीरे-धीरे सबका विश्वास जीत लिया।

💰 कितनी राशि लेकर भागा?

शोरूम मालिक के अनुसार, आरोपी लगभग ₹7.85 लाख रुपये लेकर फरार हुआ है। इनमें से कुछ कैश पेमेंट थे और कुछ UPI व चेक की रकम, जो ग्राहकों से वसूली गई थी।

इस रकम को बैंक में जमा करवाने के बजाय वह सीधे गायब हो गया।

📞 कॉल्स और मैसेज सब बंद

शुरुआत में कर्मचारियों ने सोचा कि शायद नेटवर्क की समस्या होगी, लेकिन जब आरोपी का मोबाइल बंद आना शुरू हुआ और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स भी डिएक्टिवेट मिले, तो शक गहराने लगा।

सीसीटीवी फुटेज में वह आखिरी बार दोपहर 2:30 बजे शोरूम से बाहर जाता दिखा। उसके बाद कोई जानकारी नहीं है।

🧑‍✈️ पुलिस ने दर्ज किया मामला

शोरूम के मालिक ने [थाने का नाम] थाने में जाकर आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने IPC की धारा 406 (विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अब आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर रही है और उसके पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह किसी दूसरे शहर की ओर भाग गया है।

🧾 सावधानी का सबक: वेरिफिकेशन जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि किसी भी कर्मचारी को हायर करने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन और पृष्ठभूमि जांच करना अत्यंत आवश्यक है।

शोरूम मालिक ने माना कि उन्होंने केवल आधार और पैन कार्ड लेकर उसे नियुक्त कर लिया था, जबकि पुराने नियोक्ता से कोई जानकारी नहीं ली गई।

👥 ग्राहकों में भी असंतोष

कुछ ग्राहकों का पैसा भी आरोपी के पास बकाया था, जिन्हें वह ‘अगले हफ्ते डिलीवरी’ के नाम पर टालता आ रहा था। अब वे भी शोरूम में पहुंचकर जवाब मांग रहे हैं।

शोरूम प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों को किसी भी प्रकार की वित्तीय हानि नहीं होने दी जाएगी।

⚖️ कानूनी जानकारों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला गंभीर विश्वासघात का है। यदि आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाता है और अपराध सिद्ध होता है, तो उसे सात वर्ष तक की सजा हो सकती है।

धारा 420 और 406 दोनों गैर-जमानती हैं, और कोर्ट में दोनों कंपनियों की शिकायतें जोड़कर प्रस्तुत की जा सकती हैं।

🔦 क्या सीखा जाए इस घटना से?

  1. किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति से पहले पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य करें।
  2. पुराने अनुभव पत्र और संदर्भ की पुष्टि करें।
  3. बड़े कैश हैंडलिंग के मामलों में CCTV और GPS आधारित निगरानी रखें।
  4. साप्ताहिक ऑडिट और ट्रांजेक्शन रिव्यू अनिवार्य बनाएं।

🧠 मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

अक्सर ऐसे अपराध आर्थिक तंगी या लालच के चलते होते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे एक “तेज कमाई का शॉर्टकट” समझ बैठते हैं। ऐसे मामलों में आरोपी पहले छोटे स्तर पर विश्वास अर्जित करता है और फिर एक मौके की तलाश में रहता है।

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