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अंतरजिला स्थानांतरण पर वरिष्ठता सुरक्षित: हाईकोर्ट फैसला

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 29 December 2025

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अंतरजिला स्थानांतरण पर कर्मचारियों की वरिष्ठता नहीं होगी प्रभावित, विभागीय आदेश रद्द, हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि अंतरजिला स्थानांतरण होने की स्थिति में कर्मचारी की वरिष्ठता प्रभावित नहीं की जा सकती। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो प्रशासनिक या पारिवारिक कारणों से एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित होते हैं।

यह मामला एक सरकारी कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया था कि अंतरजिला स्थानांतरण के बाद विभाग द्वारा उसकी वरिष्ठता सूची में उसे जूनियर दर्शाया गया, जिससे पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। याचिकाकर्ता का कहना था कि स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका असर उसकी सेवा अवधि या वरिष्ठता पर नहीं पड़ना चाहिए।

हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कर्मचारी की वरिष्ठता उसकी नियुक्ति तिथि और निरंतर सेवा पर आधारित होती है, न कि उसके कार्यस्थल पर। केवल जिले के परिवर्तन से कर्मचारी की वरिष्ठता समाप्त या कम नहीं की जा सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कर्मचारी की सेवा निरंतर बनी हुई है, तो अंतरजिला स्थानांतरण के आधार पर उसे जूनियर मानना कानूनन गलत है।

विभागीय आदेश रद्द

हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें स्थानांतरित कर्मचारी की वरिष्ठता को प्रभावित किया गया था। साथ ही निर्देश दिए गए कि याचिकाकर्ता की वरिष्ठता को उसके मूल पदस्थापना की तिथि के अनुसार बहाल किया जाए और यदि वरिष्ठता प्रभावित होने के कारण उसे कोई पदोन्नति या अन्य लाभ नहीं मिला है, तो उस पर पुनर्विचार किया जाए।

कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला

इस फैसले को राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में विभागों द्वारा मनमाने ढंग से की जाने वाली वरिष्ठता कटौती पर रोक लगाएगा और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करेगा।

भविष्य के मामलों में बनेगा नजीर

कानूनी जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह निर्णय भविष्य में इसी तरह के मामलों में एक मजबूत नजीर के रूप में काम करेगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासनिक स्थानांतरण का दंड कर्मचारी को वरिष्ठता के रूप में नहीं दिया जा सकता।

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