अम्बिकापुर में जिला स्तरीय हृदय जांच शिविर आयोजित, 172 बच्चों की स्क्रीनिंग, संदिग्ध मामलों को रेफर किया गया, स्वास्थ्य विभाग की पहल से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली।
अम्बिकापुर। सरगुजा जिले में बच्चों के हृदय स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला स्तरीय हृदय जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 172 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इस शिविर का उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) सहित हृदय से जुड़ी शुरुआती समस्याओं की समय रहते पहचान करना है, ताकि बच्चों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
यह शिविर छत्तीसगढ़ सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में चलाए जा रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत आयोजित किया गया।
जिला अस्पताल में आयोजित हुआ शिविर
जिला स्तरीय हृदय जांच शिविर का आयोजन अम्बिकापुर के जिला अस्पताल परिसर में किया गया। शिविर में जिले के शहरी और ग्रामीण अंचलों से आए बच्चों को लाया गया, जिनमें अधिकतर ऐसे बच्चे शामिल थे, जिनमें पहले से सांस फूलने, जल्दी थकने, नीला पड़ना, बार-बार बीमार पड़ने या वजन कम बढ़ने जैसे लक्षण देखे गए थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर चिन्हित किए गए बच्चों को ही शिविर में बुलाया गया था, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा विस्तृत जांच की जा सके।
172 बच्चों की हुई प्रारंभिक हृदय जांच
शिविर के दौरान कुल 172 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के अंतर्गत—
- ईकोकार्डियोग्राफी
- ईसीजी
- क्लीनिकल परीक्षण
- ऑक्सीजन सैचुरेशन जांच
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
डॉक्टरों की टीम ने बच्चों के हृदय की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच की और प्राथमिक रिपोर्ट तैयार की।
संदिग्ध मामलों को किया गया चिन्हित
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, स्क्रीनिंग के दौरान कुछ बच्चों में हृदय से जुड़ी संदिग्ध समस्याओं के संकेत पाए गए हैं। ऐसे बच्चों को आगे की विस्तृत जांच और उपचार के लिए चिन्हित किया गया है।
इन बच्चों को राज्य के बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।
गरीब और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा लाभ
इस शिविर का सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को मिला है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से अपने बच्चों की महंगी जांच नहीं करा पाते। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों से आए कई अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों में लंबे समय से कमजोरी और सांस की परेशानी थी, लेकिन जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
अब एक ही स्थान पर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
जन्मजात हृदय रोग पर विशेष फोकस
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों में पाए जाने वाले अधिकतर हृदय रोग जन्मजात होते हैं। यदि इनकी पहचान समय पर हो जाए, तो सर्जरी या अन्य उपचार के माध्यम से बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में माता-पिता लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। ऐसे में इस तरह के स्क्रीनिंग शिविर बेहद जरूरी हैं।
स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल
इस शिविर का आयोजन छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में जिला स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा किया गया। शिविर में बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मियों की टीम तैनात रही।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर बच्चों के लिए विशेष हृदय जांच कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ताकि गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती अवस्था में ही की जा सके।
आगे भी लगाए जाएंगे ऐसे शिविर
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि अम्बिकापुर में आयोजित यह जिला स्तरीय शिविर केवल एक चरण है। आने वाले समय में जिले के अन्य विकासखंडों में भी इसी तरह के हृदय जांच शिविर लगाए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बच्चों में कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याएं अधिक पाई जाती हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे।
अभिभावकों को दी गई स्वास्थ्य संबंधी सलाह
शिविर के दौरान डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों के हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी। उन्हें बताया गया कि—
- बच्चों में बार-बार सांस फूलना
- सीढ़ी चढ़ते समय जल्दी थक जाना
- होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना
- बार-बार निमोनिया या सर्दी-खांसी
जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान से बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। यदि शुरुआती स्तर पर बीमारी का पता चल जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अम्बिकापुर में आयोजित इस जिला स्तरीय हृदय जांच शिविर को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिले में बढ़ेगी स्क्रीनिंग की संख्या
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आने वाले महीनों में जिले में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। जिन बच्चों में हृदय या अन्य गंभीर बीमारियों के संकेत मिलेंगे, उन्हें विशेष शिविरों में बुलाया जाएगा।
इससे जिले में बच्चों की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा भरोसा
शिविर में पहुंचे अभिभावकों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह नियमित रूप से शिविर आयोजित होते रहें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी गंभीर बीमारियों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा।





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