मलूहा गांव के पांच किसानों को 25 वर्षों बाद मिला 88 लाख रुपए का मुआवजा, जिला प्रशासन की पहल से किसानों में खुशी की लहर।
रायपुर।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ ब्लॉक के ग्राम मलूहा लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद आखिरकार जिले के मलूहा गांव के पांच किसानों को 25 वर्षों से लंबित 88 लाख रुपए का मुआवजा प्राप्त हुआ। यह मुआवजा उन किसानों को दिया गया, जिनकी जमीन अधिग्रहित होने के बाद भी उन्हें वर्षों तक न्याय नहीं मिल पाया था। प्रशासनिक स्तर पर हुई इस पहल से किसानों में राहत और खुशी की लहर है।
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25 साल का लंबा संघर्ष
मलूहा गांव के जिन पांच किसानों को मुआवजा मिला है, वे करीब ढाई दशकों से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे। जमीन अधिग्रहण के बाद उन्हें वादा किया गया था कि जल्द ही उचित मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन समय बीतता गया और किसानों को न्याय मिलने में विलंब होता रहा। कई बार किसानों ने धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन फाइलें अटकी रहीं।
प्रशासनिक पहल से मिली राहत
हाल ही में जिला प्रशासन ने इस मामले को प्राथमिकता से लिया और अधूरे पड़े मुआवजा प्रकरण को निपटाने का निर्णय लिया। इसके बाद पांच किसानों को 88 लाख रुपए की राशि जारी की गई। यह मुआवजा किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर किया गया। इससे ग्रामीणों में विश्वास जागा है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति से वर्षों पुराने मामले भी सुलझाए जा सकते हैं।
किसानों की प्रतिक्रिया
मुआवजा प्राप्त करने के बाद किसानों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भटकने के बाद जब उनके हक की राशि हाथ में आई, तो उनकी आंखें भर आईं। किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया।
मुआवजे का महत्व
किसानों के अनुसार यह राशि उनके जीवन को स्थिरता देने में सहायक होगी। कई किसान कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, अब उन्हें राहत मिली है। इस धनराशि से वे कृषि कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकेंगे और अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य बना पाएंगे।
सरकार की योजनाओं पर विश्वास
इस निर्णय से अन्य प्रभावित किसानों को भी उम्मीद जगी है कि उनकी लंबित समस्याओं का समाधान होगा। राज्य सरकार पहले ही किसान कल्याण को अपनी प्राथमिकता मान चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।
निष्कर्ष
मलूहा गांव के पांच किसानों को मिला 88 लाख रुपए का मुआवजा न केवल एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि धैर्य और संघर्ष से न्याय पाया जा सकता है। यह घटना अन्य किसानों के लिए भी उम्मीद की किरण साबित होगी।





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