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प्रधानमंत्री मोदी ने भूपेन हजारिका जयंती पर लिखा लेख

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 8 September 2025

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती पर लिखा भावपूर्ण लेख, उनके संगीत और समाजिक योगदान को याद करते हुए प्रेरणा दी।

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय पहचान रखने वाले भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती पर एक विशेष और भावपूर्ण लेख लिखा। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में भूपेन हजारिका के अद्वितीय योगदान, उनके संदेश और समाज पर उनके प्रभाव को विस्तार से साझा किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में कहा कि भूपेन हजारिका केवल एक संगीतकार या गायक नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से समाज को जागरूक किया। उनके गीतों में सामाजिक मुद्दों, मानवता और देशभक्ति के भाव हमेशा स्पष्ट रूप से झलकते थे। उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका की कलाकारी का दायरा केवल असम या भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और संगीत की पहचान को मजबूती दी।

प्रधानमंत्री ने अपने लेख में उल्लेख किया कि भूपेन हजारिका के गीतों में हमेशा आम जनता के सुख-दुख की झलक मिलती थी। उनके संगीत ने लोगों को जोड़ा और समाज में प्रेम, भाईचारा और सहानुभूति के मूल्य फैलाए। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि भूपेन हजारिका के गीत हमेशा हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब रहे हैं।

PM मोदी ने आगे लिखा कि भूपेन हजारिका की जयंती केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह हमें उनके जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने का अवसर देती है। उनके गीतों में छुपे संदेश आज भी प्रासंगिक हैं और हमें सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवता के मूल्यों की याद दिलाते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में यह भी साझा किया कि भूपेन हजारिका का संगीत नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भूपेन हजारिका की जीवन यात्रा और उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा। उन्होंने लिखा कि भूपेन हजारिका ने असम और पूरे भारत को गर्व महसूस कराया और उनके गीत हमेशा भारतीय संस्कृति के अमूल्य धरोहर के रूप में जीवित रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में यह भी जोर दिया कि भूपेन हजारिका का संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि समाज और देश के लिए जागरूकता फैलाने का उपकरण भी था। उनके गीतों में प्रेम, शांति और मानवता का संदेश छुपा हुआ था, जो आज के समाज में भी उतना ही प्रासंगिक है।

प्रधानमंत्री ने अपने लेख का समापन भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए किया और कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लिखा कि भूपेन हजारिका की विरासत आज भी हमारे बीच जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

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