रायपुर की पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। छोटे व्यवसाय से आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की।
स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक महिला ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। पूनम देवी आज आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
पहले जहां उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था, वहीं अब वह अपने प्रयासों से न केवल परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं बल्कि समाज में भी एक मिसाल बन गई हैं।
छोटे स्तर से शुरू किया काम
पूनम देवी बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हुआ।
उन्होंने अपने गांव में ही एक छोटा व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया। मेहनत और लगन से उनके काम को पहचान मिलने लगी और आय में भी बढ़ोतरी होने लगी।
परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार
पूनम देवी के इस प्रयास से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। अब वह घर के खर्चों में सहयोग कर पा रही हैं और बच्चों की पढ़ाई व अन्य जरूरतों को भी बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं।
उनका कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आत्मविश्वास मिला और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर भी मिला।
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
पूनम देवी की सफलता की कहानी आसपास की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उनके प्रयास को देखकर अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूह से जुड़ने और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आगे आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि समाज में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
पूनम देवी का उदाहरण दिखाता है कि यदि महिलाओं को अवसर मिले तो वे अपनी मेहनत से जीवन की दिशा बदल सकती हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती महिलाएं
रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी योगदान दे रही हैं।
पूनम देवी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से किसी भी महिला के लिए आत्मनिर्भर बनना संभव है।
