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वाड्रफनगर जनपद में पीएफ घोटाला, दो गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 29 July 2025

वाड्रफनगर जनपद में कर्मचारियों के पीएफ खातों से 12 लाख रुपए उड़ाए गए। जांच में घोटाला उजागर, दो कर्मचारी गिरफ्तार किए गए।

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर जनपद पंचायत कार्यालय में एक चौंकाने वाला पीएफ (प्रोविडेंट फंड) घोटाला उजागर हुआ है। यहां काम करने वाले कर्मचारियों के पीएफ खातों से कुल 12 लाख रुपये गबन किए जाने का मामला सामने आया है। इस घोटाले में शामिल पाए गए कम्प्यूटर ऑपरेटर और लेखापाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

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इस मामले ने न केवल जनपद कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा पर भी चिंता पैदा कर दी है।

📍 घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?

यह घोटाला तब सामने आया जब कुछ कर्मचारियों ने अपने पीएफ खातों की जांच की और उन्हें राशि में भारी कमी दिखाई दी। संदेह होने पर उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद जांच प्रारंभ की गई, जिसमें सामने आया कि पिछले कुछ महीनों से नियमित रूप से कर्मचारियों के पीएफ खातों से रकम ट्रांसफर कर निजी खातों में डाली जा रही थी।

जांच में स्पष्ट हुआ कि यह रकम जानबूझकर हेराफेरी कर निकाली गई थी। पैसे की यह निकासी डिजिटल माध्यम से की गई थी, जिससे ट्रैकिंग संभव हुई।

👮‍♂️ गिरफ्तारी और पुलिस जांच:

जांच के आधार पर जनपद कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखापाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर यह रकम निकाली।

थाना प्रभारी ने मीडिया को बताया, “आरोपियों ने तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर पीएफ सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ की और कर्मचारियों की मूल राशि को ट्रांसफर कर लिया। अपराध स्वीकार कर लिया गया है।”

🧾 कैसे उड़ाए गए पैसे?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएफ सॉफ्टवेयर में लॉगिन करने के बाद फर्जी वेतन स्लिप और पीएफ स्टेटमेंट तैयार किए गए। इसके आधार पर राशि धीरे-धीरे निकाल कर एक फर्जी खाते में ट्रांसफर की गई।

यह प्रक्रिया कई महीनों तक जारी रही, जिससे 12 लाख रुपये तक की हेराफेरी हो गई। एक विशेष बात यह रही कि हर बार छोटी राशि निकाली जाती थी ताकि कोई शक न हो।

🧑‍💼 जनपद सीईओ का बयान:

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कहा कि मामला गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि सभी खातों की गहन ऑडिट की जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि और कितनी राशि की हेराफेरी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए दो-स्तरीय वेरीफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा।

👥 कर्मचारियों में नाराजगी और डर:

इस खुलासे के बाद कर्मचारियों में रोष और असुरक्षा की भावना है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से जमा पीएफ राशि को इस तरह से लूटा जाना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।

एक कर्मचारी ने कहा, “हम अपनी नौकरी की तनख्वाह से कटने वाले पीएफ पर भरोसा करते हैं, लेकिन अब लग रहा है कि वो भी सुरक्षित नहीं है।”

⚖️ क्या कहता है कानून?

ऐसे मामलों में IPC की धारा 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), और IT एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई जाती हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को 7 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

📣 भविष्य की सावधानियां:

इस घटना के बाद जिला प्रशासन और पंचायत विभाग को आदेश दिया गया है कि सभी जनपदों में पीएफ खातों और आर्थिक लेनदेन की ऑडिट की जाए। साथ ही, सॉफ्टवेयर में OTP आधारित वेरिफिकेशन और ट्रिपल लेयर ऑथेंटिकेशन लागू करने की सिफारिश की गई है।

🛑 सोचने वाली बात:

कर्मचारियों की भविष्य निधि यानी PF को लूटने वाले ये अधिकारी सिर्फ आर्थिक अपराधी नहीं हैं, ये भरोसे का खून करते हैं। सवाल यह भी है कि क्या इस गड़बड़ी में केवल दो लोग शामिल थे या किसी बड़े नेटवर्क की परछाई इसमें छुपी हुई है?

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