PCC चीफ बैज ने कहा कमिश्नर प्रणाली से कोई फायदा नहीं, नक्सलवाद पर सतर्क रहना जरूरी, गृह मंत्री को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष बैज ने राज्य में लागू कमिश्नर प्रणाली को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कमिश्नर प्रणाली से छत्तीसगढ़ को कोई लाभ नहीं मिल रहा है और यह केवल प्रशासनिक ढांचे का एक दिखावटी बदलाव है। बैज ने यह भी सुझाव दिया कि अगर गृह मंत्री बदलाव करते हैं तो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
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बैज ने नक्सलवाद के मुद्दे पर सरकार को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के मामलों में सरकार को ओवर कॉन्फिडेंस नहीं करना चाहिए। छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में नक्सलियों की गतिविधियां अभी भी सक्रिय हैं, और यह ज़रूरी है कि राज्य प्रशासन सतर्क रहे और न केवल आंकड़ों के आधार पर सुरक्षा का मूल्यांकन करे।
बैज ने बताया कि कमिश्नर प्रणाली में अक्सर निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा नहीं हो पाता। उनका मानना है कि केवल पदों और रिपोर्टिंग संरचना में बदलाव से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री को राज्य की सुरक्षा और विकास दोनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। न केवल सुरक्षा के मामलों में, बल्कि ग्रामीण विकास और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी भी मजबूत होनी चाहिए।
बैज के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कमिश्नर प्रणाली लागू करने के पीछे सरकारी तर्क यह था कि इससे प्रशासनिक फैसले तेज़ी से लिए जा सकेंगे और राज्य के विकास कार्य सुचारू होंगे। लेकिन उनके अनुभव और आंकड़ों के अनुसार, यह सिस्टम अपेक्षित लाभ नहीं दे पाया है।
उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि राज्य सरकार को स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना चाहिए, जिसमें ज़िला स्तर पर अधिक अधिकार और स्वतंत्रता दी जाए। साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और विकास एजेंसियों के बीच समन्वय को और सशक्त बनाना होगा।
बैज ने यह स्पष्ट किया कि कमिश्नर प्रणाली केवल नौकरशाही में बदलाव है और जनता तक इसके सकारात्मक परिणाम नहीं पहुंचे हैं। उनका मानना है कि अगर राज्य की प्रशासनिक संरचना को वास्तविक रूप से सुधारना है, तो नीतिगत बदलाव, बेहतर निगरानी और जनता की भागीदारी जरूरी है।
बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे राज्य में नक्सलवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। आंकड़ों पर भरोसा करके सरकार यह सोचती है कि समस्या हल हो गई है, लेकिन जमीन पर स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हमें सतर्क रहना होगा।”
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के गृह मंत्री को सक्रिय नेतृत्व करना चाहिए। न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक सुधार और विकास कार्यों की निगरानी भी खुद करनी चाहिए।
बैज का यह बयान ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में कमिश्नर प्रणाली लागू होने के कुछ साल पूरे हो चुके हैं, और इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष और सामाजिक संगठन लगातार इस प्रणाली की आलोचना कर रहे हैं और इसे केवल नौकरशाही में दिखावटी बदलाव मान रहे हैं।





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