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रायपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों में खुशियों की बहार

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 9 October 2025

रायपुर के आंगनबाड़ी केंद्र अब रंगीन और आकर्षक बन चुके हैं, जहां बच्चों की हंसी, खेल और सीखने के नए अवसरों से भविष्य निखर रहा है।

रायपुर। राजधानी रायपुर के आंगनबाड़ी केंद्र अब पहले जैसे नहीं रहे। कभी साधारण और सीमित संसाधनों वाले ये केंद्र अब बच्चों की हंसी-खुशी, रंग-बिरंगी दीवारों और आधुनिक सुविधाओं से जगमगा रहे हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

अब ये केंद्र सिर्फ पोषण वितरण का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के केंद्र बन चुके हैं। बच्चों की खिलखिलाती मुस्कान और खेलते-सीखते कदमों ने इन केंद्रों को जीवन से भर दिया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल पर रायपुर जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया गया है। दीवारों पर शैक्षणिक चित्र, अक्षर, अंक, जानवरों और फूलों की रंगीन पेंटिंग की गई हैं, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं।

कलेक्टर ने बताया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि हर आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और प्रेरक वातावरण प्रदान करे। इसके लिए भवनों की मरम्मत, फर्श की सफाई, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं को बेहतर किया गया है।

रायपुर की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुनीता वर्मा बताती हैं, “पहले बच्चे आंगनबाड़ी आने में झिझकते थे, अब वे खुद उत्साह से आते हैं। रंग-बिरंगे माहौल में पढ़ना और खेलना उन्हें बेहद पसंद है।”

इस बदलाव का असर न केवल बच्चों पर, बल्कि अभिभावकों पर भी दिख रहा है। अब अधिक से अधिक माता-पिता अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने लगे हैं। इससे न केवल बाल शिक्षा बल्कि बाल पोषण स्तर में भी सुधार आया है।

सरकार ने इन केंद्रों में स्मार्ट लर्निंग टूल्स और शैक्षणिक खिलौनों की भी व्यवस्था की है, जिससे बच्चे मनोरंजन के साथ सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं।

महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने बताया कि “हमारा लक्ष्य है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए ‘पहला स्कूल’ बनें, जहां वे सुरक्षित और आनंददायक वातावरण में अपनी शिक्षा यात्रा शुरू करें।”

कई आंगनबाड़ी केंद्रों में अब मिनी लाइब्रेरी, बाल खेल सामग्री, और पौष्टिक आहार वितरण व्यवस्था भी शुरू की गई है। बच्चों को प्रतिदिन ताजा और पौष्टिक भोजन मिल रहा है, जिससे कुपोषण के मामलों में कमी देखी जा रही है।

रायपुर के ग्रामीण इलाकों में भी इन केंद्रों का प्रभाव तेजी से फैल रहा है। जहां पहले केंद्रों की स्थिति कमजोर थी, अब वहां बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। समुदाय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से इन केंद्रों को “बाल विकास केंद्र” के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया है।

कलेक्टर ने बताया कि जिले में नन्हे कदम अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को सुंदर और बच्चों के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अभियान के तहत केंद्रों की सजावट, फर्नीचर, और शिक्षण सामग्री को आकर्षक रूप दिया जा रहा है।

इसके अलावा, माताओं के लिए नियमित पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और आहार के महत्व को समझ सकें।

रायपुर की निवासी कविता यादव, जो अपने तीन वर्षीय बेटे को आंगनबाड़ी भेजती हैं, कहती हैं — “अब केंद्र ऐसा लगता है जैसे कोई छोटा प्ले-स्कूल हो। मेरा बच्चा हर दिन वहां जाने के लिए उत्साहित रहता है।”

इन सुधारों से न केवल बच्चों का विकास हो रहा है, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ा है। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी गर्व से अपने केंद्र को “सीखने और खेलने का मंदिर” कहती हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है कि अगले वर्ष तक जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्रों में तब्दील किया जाए। इसके लिए पंचायत और शहरी निकायों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी केंद्र में सफाई, पानी या भोजन की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, बच्चों की उपस्थिति और प्रगति का रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट किया जाए।

सामुदायिक सहयोग भी इस परिवर्तन का बड़ा कारण बना है। स्थानीय युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्कूल शिक्षकों ने भी आंगनबाड़ी केंद्रों को सजाने-संवारने में मदद की है।

अब इन केंद्रों में दीपावली, बाल दिवस, और गणतंत्र दिवस जैसे त्योहार मनाए जाते हैं, जिससे बच्चों में सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ रही है।

आंगनबाड़ी केंद्रों की यह नई तस्वीर सिर्फ दीवारों पर रंगों का नहीं, बल्कि आने वाले कल के उज्जवल भविष्य का प्रतीक बन चुकी है। यहां हर बच्चे की खिलखिलाहट इस बात का सबूत है कि जब वातावरण सकारात्मक होता है, तो सीखने की राह आसान और सुंदर बन जाती है।

रायपुर प्रशासन और सरकार के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत विकास की हो, तो आंगनबाड़ी जैसे छोटे केंद्र भी बड़े परिवर्तन की मिसाल बन सकते हैं।

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