खैरागढ़ में जैविक खेती प्रशिक्षण में सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर रासायनिक खेती छोड़ने और प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया।
खैरागढ़। जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैकड़ों किसानों ने भाग लिया और रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती के लाभ, तकनीक और बाजार संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसके साथ ही किसानों की लागत कम होती है और उन्हें बेहतर मूल्य भी मिलता है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक खाद बनाने, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक विकल्पों की जानकारी दी गई।
किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। किसानों को खेत की मिट्टी परीक्षण, प्राकृतिक कीटनाशक बनाने और फसल चक्र अपनाने के तरीकों से अवगत कराया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खेती से न केवल उत्पादन सुरक्षित होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।
सैकड़ों किसानों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग को कम कर जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया। किसानों ने कहा कि जैविक खेती से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलता है।
बाजार में बढ़ रही मांग
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। शहरों में लोग जैविक अनाज, फल और सब्जियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ी है।
सरकार दे रही प्रोत्साहन
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और विपणन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
जैविक खेती से मिट्टी, पानी और पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। विशेषज्ञों ने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर देने की अपील की।
किसानों ने जताई खुशी
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने कहा कि उन्हें नई तकनीकों की जानकारी मिली है, जिससे खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
खैरागढ़ में आयोजित जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए लाभदायक साबित हुआ। सैकड़ों किसानों ने जैविक खेती अपनाने का संकल्प लिया।
