ओलिंपियन अमन सहरावत ने आंख में चोट के बावजूद शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता। उनकी जीत साहस, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने की मिसाल बनी।
बहादुरगढ़। हरियाणा के झज्जर जिले से ताल्लुक रखने वाले ओलिंपियन पहलवान अमन सहरावत ने एक बार फिर देश का नाम रोशन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। खास बात यह रही कि मुकाबले के दौरान आंख में गंभीर चोट लगने के बावजूद अमन ने हार नहीं मानी और अद्भुत साहस का परिचय देते हुए फाइनल जीत लिया।
प्रतियोगिता के दौरान अमन की आंख पर जोरदार चोट लगी, जिससे कुछ देर के लिए मुकाबला रोकना पड़ा। चिकित्सकीय जांच के बाद जब उनसे खेल जारी रखने को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने दर्द को नजरअंदाज करते हुए मैट पर लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने जिस आक्रामकता और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला खेला, उसने दर्शकों और विशेषज्ञों सभी को प्रभावित कर दिया।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद अमन सहरावत ने कहा, “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं है, यह उन सभी लोगों के विश्वास की जीत है, जिन्होंने मुश्किल समय में मेरा साथ दिया। मैंने खुद से वादा किया था कि हालात चाहे जैसे भी हों, हार नहीं मानूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि चोट खेल का हिस्सा है, लेकिन हौसला और आत्मविश्वास ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाता है।
अमन की इस जीत पर झज्जर और बहादुरगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है। खेल प्रेमियों, स्थानीय प्रशासन और खेल संघों ने उन्हें बधाइयां दीं। कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि अमन ने यह साबित कर दिया कि सच्चा खिलाड़ी वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी डटा रहे।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वर्ण पदक आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए अमन के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगा। उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय कुश्ती के उज्ज्वल भविष्य का संकेत भी मानी जा रही है।





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