नीति आयोग की नेशनल कॉन्फ्रेंस में पॉलिसी मेकर्स और एक्सपर्टस ने युवाओं को वैश्विक पहचान दिलाने और आर्थिक विकास पर चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस में विभिन्न सत्रों में नीति निर्माण, आर्थिक विकास, शिक्षा, तकनीकी नवाचार और युवा सशक्तिकरण पर गहन चर्चा हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की विकास यात्रा में सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने बताया कि सरकार डिजिटल शिक्षा, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाने पर जोर दे रही है।
कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य, राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल हुए। विभिन्न पैनल डिस्कशन और वर्कशॉप में आर्थिक सुधारों, सामाजिक कल्याण योजनाओं, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण, और डिजिटल इंडिया के तहत नई योजनाओं पर विचार विमर्श हुआ।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए कि युवा केवल शिक्षा और कौशल में ही नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता में भी विकसित हों। पॉलिसी मेकर्स ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करें और युवाओं को वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर दें।
कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे उदाहरणों और सफल मॉडलों को साझा करना भी था। इस दिशा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आने वाले प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव प्रस्तुत किए।
