जांजगीर-चांपा के सिवनी गांव में बंदर ने नवजात को कुएं में फेंका, डायपर और ग्रामीणों की बहादुरी से 20 दिन की बच्ची की जान बची।
जांजगीर-चांपा। जिले के नैला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिवनी में मंगलवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक उग्र बंदर ने मां की गोद से महज 20 दिन की नवजात बच्ची को छीनकर पास के कुएं में फेंक दिया। हालांकि, ईश्वर की कृपा, बच्ची के डायपर और ग्रामीणों की तत्परता से उसकी जान बच गई। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते बंदरों के आतंक को एक बार फिर उजागर करती है।
अचानक हुआ हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सिवनी निवासी सुनीता राठौर मंगलवार दोपहर अपने घर के बाहर अपनी 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को गोद में लेकर टहल रही थीं। इसी दौरान छत पर उछल-कूद कर रहे 4 से 5 बंदरों में से एक बंदर अचानक नीचे कूदा और झपट्टा मारकर बच्ची को मां की गोद से छीन लिया। सुनीता कुछ समझ पातीं, इससे पहले ही बंदर बच्ची को लेकर भाग गया।
घटना होते ही घर और आसपास मौजूद लोग चीख-पुकार करने लगे। परिजन और ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर और शोर मचाकर बंदर को भगाने की कोशिश की, लेकिन बंदर पास ही स्थित एक खुले कुएं तक पहुंच गया और बच्ची को सीधे कुएं में फेंक दिया।
कुएं में गिरते ही मच गया हड़कंप
जैसे ही बच्ची कुएं में गिरी, पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजन बदहवास हालत में कुएं की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने तुरंत रस्सी, बाल्टी और अन्य साधनों की मदद से बच्ची को निकालने का प्रयास शुरू किया।
इसी दौरान एक चमत्कारी संयोग भी सामने आया। बच्ची ने जो डायपर पहन रखा था, उसने लाइफ जैकेट की तरह काम किया। डायपर में फंसी हवा की वजह से बच्ची पानी की सतह पर तैरती रही और डूबने से बच गई।
ग्रामीणों की बहादुरी और सूझबूझ
करीब कुछ ही मिनटों के भीतर ग्रामीणों ने बाल्टी और रस्सी के सहारे बच्ची को कुएं से बाहर निकाल लिया। बच्ची उस समय बेसुध हालत में थी और सांसें बेहद धीमी चल रही थीं।
इसी बीच, गांव में पास ही कथा सुनने आई एक प्रशिक्षित नर्स मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना समय गंवाए बच्ची को तुरंत CPR दिया। कुछ ही पलों में बच्ची की सांस फिर से चलने लगी और रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। यह दृश्य देखकर मौजूद लोग भावुक हो उठे।
अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर
इसके बाद बच्ची को तत्काल जांजगीर जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि कुछ मिनट की भी देर होती तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।
परिवार वालों ने ग्रामीणों, नर्स और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया और इसे ईश्वर का चमत्कार बताया।
बंदरों के आतंक से दहशत
इस घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। वे घरों में घुसकर खाने-पीने की चीजें छीनते हैं और अब बच्चों पर भी हमला करने लगे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव और आसपास के इलाकों में बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की व्यवस्था जल्द की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों के नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे कर बंदरों को पकड़ने की मांग की है।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए भयावह अनुभव रही, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी भी है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष अब ग्रामीण इलाकों में गंभीर समस्या बनता जा रहा है।


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