छत्तीसगढ़ के कृषक केंद्र में पड़ी लाखों की खाद और दवाइयां सड़ीं, पंचायत ने ट्रैक्टर से फिंकवाया, प्रशासन ने जांच के आदेश दिए।
गरियाबंद।छत्तीसगढ़ राज्य की एक और सरकारी योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। कृषक सेवा केंद्र में लंबे समय से पड़ी-पड़ी लाखों रुपए की खाद और कृषि दवाइयों के सड़ने की घटना सामने आई है। गांव की पंचायत ने जब इस स्थिति को देखा, तो गुस्से में आकर पूरा माल ट्रैक्टर में भरवाकर फिंकवा दिया। अब जब यह मामला तूल पकड़ चुका है, तब जाकर कृषि उपसंचालक ने जांच के आदेश दिए हैं और कार्रवाई की बात कही है।
क्या है पूरा मामला?
मामला राजनांदगांव जिले के अंतर्गत आने वाले एक पंचायत क्षेत्र का है, जहां सरकारी कृषि योजना के तहत किसानों को अनुदानित दरों पर खाद और कीटनाशक दवाइयां वितरित की जानी थीं। ये सामग्री कृषक सेवा केंद्र में पिछले कई महीनों से बिना वितरण के पड़ी रही। लापरवाही का आलम ये रहा कि खुले में पड़ी रहने के कारण खाद सड़ने लगी और दवाइयों की एक्सपायरी हो गई।
पंचायत ने जताया आक्रोश, ट्रैक्टर से फिंकवाया माल
गांव के कुछ किसानों और सरपंच ने जब इस मामले को देखा तो पहले संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने खुद ट्रैक्टर बुलवाया और सारी खराब खाद व दवा को पास के एक गड्ढे में फिंकवा दिया।
सरपंच ने मीडिया को बताया, “हम किसानों के लिए योजना लाई जाती है लेकिन उन पर अमल नहीं होता। हम बार-बार अधिकारियों को सूचना दे रहे थे लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।”
लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक खराब हुई खाद और दवाइयों की अनुमानित कीमत लगभग ₹3 लाख से अधिक बताई जा रही है। ये सामान अगर समय पर वितरित होता तो कई किसानों को लाभ मिल सकता था। अब सवाल उठ रहा है कि जब ये सामग्री केंद्र में पहुंच चुकी थी तो उसका वितरण क्यों नहीं हुआ?
कृषि उपसंचालक का जवाब
इस मामले पर जब कृषि उपसंचालक से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “हमें इस विषय में जानकारी मिली है। जांच टीम गठित की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
ग्रामीणों में आक्रोश और प्रशासन पर सवाल
गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सरकारी योजना की सामग्री वितरण से पहले ही खराब हो गई हो। इससे पहले भी बीजों के वितरण में देरी और गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं।
किसानों की आवाज दब रही है
स्थानीय किसान संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि यह घटना केवल एक गांव की नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में इस प्रकार की लापरवाही आम हो गई है। “किसानों को योजना के नाम पर दिखावा मिलता है, असली मदद कभी समय पर नहीं पहुंचती,” उन्होंने कहा।
राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू
इस मामले को लेकर स्थानीय विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। एक विपक्षी विधायक ने बयान जारी करते हुए कहा, “सरकार किसानों की योजनाओं को लेकर गंभीर नहीं है। करोड़ों का बजट है लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसका फायदा नहीं पहुंच रहा।”
क्या कहती हैं सरकारी गाइडलाइंस?
कृषि योजनाओं के तहत खाद और कीटनाशकों का वितरण निश्चित समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए। एक्सपायरी डेट से पहले इन्हें किसानों तक पहुंचाना अनिवार्य होता है। किसी भी प्रकार की देरी के लिए कृषि विभाग जिम्मेदार होता है और लापरवाही के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
अब आगे क्या?
जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि किस स्तर पर चूक हुई – क्या ये पंचायत स्तर की गलती थी, या फिर कृषि विभाग की लापरवाही? लेकिन फिलहाल इस पूरे मामले में किसानों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल है।
निष्कर्ष
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना होता है, लेकिन यदि ऐसे ही प्रशासनिक लापरवाही से लाखों की सामग्री बर्बाद होती रहेगी, तो किसानों का विश्वास तंत्र पर से उठना तय है। अब देखना यह होगा कि कृषि विभाग केवल जांच तक सीमित रहता है या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करता है।


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