सिम्स बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय कार्यशाला में चिकित्सा शिक्षा, शोध और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर देशभर के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) बिलासपुर में राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर गहन मंथन करना रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सिम्स प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्घाटन संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय कार्यशालाएं चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान-विनिमय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
तीन दिनों तक चली इस कार्यशाला में आधुनिक चिकित्सा तकनीक, क्लिनिकल रिसर्च, मेडिकल एथिक्स, मरीजों की सुरक्षा, डिजिटल हेल्थ और नई डायग्नोस्टिक विधियों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए केस स्टडी और प्रैक्टिकल सेशंस के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला के दौरान इंटरएक्टिव सेशन, पैनल डिस्कशन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का भी आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। युवा डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने इसे अपने करियर के लिए बेहद उपयोगी बताया।
समापन सत्र में सिम्स प्रशासन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस कार्यशाला ने न केवल सिम्स की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को और मजबूत किया, बल्कि बिलासपुर को चिकित्सा शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाई।
