मोहला में राजमिस्त्री प्रशिक्षण से ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिला, आधुनिक निर्माण तकनीक सीखी और पहले से दोगुनी आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए।
मोहला। मोहला जिले में आयोजित राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख दी है। कौशल विकास को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से दर्जनों युवाओं को आधुनिक निर्माण कार्यों से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्रदान की गई, जिससे आज उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन एवं कौशल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से किया गया। इसमें ग्रामीण अंचलों से आए बेरोजगार एवं अर्ध-कुशल युवाओं को राजमिस्त्री कार्य की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण के दौरान भवन निर्माण, ईंट चिनाई, प्लास्टर, टाइल्स फिटिंग, सीमेंट कंक्रीट कार्य, ड्रॉइंग के अनुसार निर्माण तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई।
रोजगार से जुड़कर बदली आर्थिक स्थिति
प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद युवाओं को स्थानीय निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और आवास निर्माण योजनाओं से जोड़ा गया। कई युवाओं ने स्वयं का छोटा निर्माण कार्य समूह बनाकर काम शुरू किया है। पहले जहां ये युवा दिहाड़ी मजदूरी कर सीमित आमदनी पर निर्भर थे, वहीं अब प्रशिक्षित राजमिस्त्री के रूप में काम कर रहे हैं और उनकी मासिक आय पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है।
युवाओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक निर्माण स्थलों पर अभ्यास भी कराया गया। प्रशिक्षकों द्वारा आधुनिक औजारों के प्रयोग, गुणवत्तापूर्ण निर्माण तकनीक और समय प्रबंधन के गुर सिखाए गए। युवाओं को यह भी बताया गया कि सरकारी आवास योजनाओं और निजी निर्माण कार्यों में कुशल राजमिस्त्रियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
स्वरोजगार की ओर बढ़ते कदम
कुछ प्रशिक्षित युवाओं ने स्वयं का कार्य प्रारंभ कर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-मोटे निर्माण कार्य, मरम्मत और घरों के विस्तार का काम संभाल लिया है। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिला है, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी काम से जोड़ा जा रहा है। इससे क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
शासन की योजनाओं से मिला लाभ
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को कौशल विकास योजनाओं, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तथा राज्य शासन की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिससे उन्हें ठेकेदारों एवं निर्माण कंपनियों के साथ काम पाने में सुविधा हो रही है।
युवाओं ने साझा किए अपने अनुभव
प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवाओं ने बताया कि पहले उन्हें निर्माण कार्य की सीमित जानकारी थी, जिसके कारण उन्हें कम मजदूरी मिलती थी। प्रशिक्षण के बाद वे अब गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित निर्माण कार्य कर पा रहे हैं। इससे उनकी पहचान कुशल राजमिस्त्री के रूप में बनी है और काम की निरंतरता भी बढ़ी है।
ग्रामीण विकास में अहम भूमिका
जिला प्रशासन का कहना है कि ऐसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न केवल युवाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है। आने वाले समय में जिले के अन्य गांवों में भी इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को लाभ मिल सके।
