छत्तीसगढ़ में घटती छात्र संख्या और संसाधनों की कमी के चलते कई स्कूल बंद या मर्ज हो सकते हैं। डीईओ ने DPI को पत्र लिखकर प्रस्ताव भेजा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के कई जिलों में स्कूल बंद करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसे लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) ने स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। प्रस्तावित कदम का कारण छात्रों की लगातार घटती संख्या, शिक्षकों की कमी और संसाधनों का प्रभावी उपयोग बताया जा रहा है।
छात्र संख्या घटने से संकट
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम हो गई है। कुछ स्कूलों में तो 10 से भी कम बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में अलग-अलग स्कूल संचालित करना न तो शैक्षणिक दृष्टि से लाभकारी है और न ही प्रशासनिक रूप से।
स्कूल मर्जर या बंदी की तैयारी
डीईओ द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी संकेत दिया गया है कि जिन स्कूलों में छात्र संख्या अत्यंत कम है, उन्हें नजदीकी स्कूलों में मर्ज किया जा सकता है या फिर पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसका उद्देश्य शिक्षकों और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
शिक्षकों की कमी भी बड़ी वजह
कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली हैं। एक या दो शिक्षकों के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। विभाग का मानना है कि स्कूलों के समेकन से इस समस्या को भी काफी हद तक सुलझाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता
हालांकि, स्कूल बंद करने या मर्ज करने की खबर से ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि नजदीकी स्कूल दूर हुआ तो छोटे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
DPI स्तर पर होगा अंतिम फैसला
डीईओ के पत्र के बाद अब गेंद DPI के पाले में है। DPI द्वारा सभी जिलों से मिले प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी और इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों के हितों को प्राथमिकता में रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाएगा।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रयास
गौरतलब है कि इससे पहले भी राज्य में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के तहत कई स्कूलों को मर्ज किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।





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