छत्तीसगढ़ में स्कूल रिजल्ट सिस्टम बदला, तिमाही-छमाही अंकों से बनेगा फाइनल परिणाम, बोर्ड परीक्षा में बदलाव नहीं, सालभर की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। अब स्कूलों में छात्रों का फाइनल रिजल्ट केवल वार्षिक परीक्षा के आधार पर नहीं, बल्कि तिमाही और छमाही परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार किया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस नए निर्णय के तहत पूरे साल की पढ़ाई और मूल्यांकन को महत्व दिया जाएगा। हालांकि, यह व्यवस्था बोर्ड परीक्षाओं पर लागू नहीं होगी, बोर्ड एग्जाम पहले की तरह ही आयोजित किए जाएंगे।
सालभर की पढ़ाई से बनेगा परिणाम
नए सिस्टम के अनुसार छात्रों का मूल्यांकन निरंतर और समग्र आधार पर किया जाएगा। तिमाही, छमाही परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा में सहभागिता, परियोजना कार्य और नियमित उपस्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे छात्र केवल परीक्षा के समय पढ़ाई करने की बजाय पूरे वर्ष पढ़ाई पर ध्यान देंगे।
रटने की प्रवृत्ति पर लगेगी रोक
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से रटंत विद्या की प्रवृत्ति कम होगी। छात्र अब सालभर लगातार पढ़ाई करेंगे और विषयों की बेहतर समझ विकसित होगी। इससे मानसिक दबाव भी घटेगा, जो अक्सर वार्षिक परीक्षा के दौरान छात्रों पर देखने को मिलता है।
शिक्षकों की भूमिका होगी अहम
इस नई व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। शिक्षकों को समय-समय पर छात्रों का आकलन करना होगा और उनकी प्रगति का रिकॉर्ड रखना होगा। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी।
अभिभावकों को मिलेगी राहत
अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। अब बच्चों का भविष्य एक ही परीक्षा पर निर्भर नहीं रहेगा, जिससे असफलता का डर कम होगा।
बोर्ड परीक्षा रहेगी अलग
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं इस व्यवस्था से बाहर रहेंगी। बोर्ड परीक्षाएं पहले की तरह निर्धारित पैटर्न पर ही आयोजित होंगी।
शिक्षा विभाग का बयान
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों के अनुरूप है और इसका उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है।





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