महादेव सट्टा ऐप केस में फरार सटोरी का वीडियो वायरल, पुलिसकर्मी पर 48 लाख रुपये कमाने का आरोप, ASP बोले- जांच के बाद कार्रवाई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस मामले में फरार चल रहे एक सटोरी ने वीडियो जारी कर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। वीडियो में उसने एक आरक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि उसने महज एक महीने में सट्टा एप से उसे 48 लाख रुपये का मुनाफा कमा कर दिया।
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वीडियो के वायरल होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। एएसपी ने बयान जारी कर कहा है कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
📽️ क्या है वीडियो में?
वायरल वीडियो में आरोपी सटोरी अपने चेहरे को ढककर दावा कर रहा है कि एक पुलिस आरक्षक पिछले कई महीनों से उसके साथ मिलकर महादेव सट्टा ऐप के माध्यम से मोटी रकम कमा रहा था।
उसने कहा, “मैंने एक महीने में ही उसे 48 लाख रुपये प्रॉफिट में दिए। अब वही मुझे फंसा रहा है, जबकि खुद शामिल था।”
सटोरी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी की मिलीभगत से सट्टा कारोबार फल-फूल रहा था और अब जब मामला बड़ा हो गया है तो वह खुद को अलग दिखा रहा है।
🧑✈️ पुलिस विभाग में मचा हड़कंप:
वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई। आरक्षक का नाम उजागर नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह रायपुर जिले में ही पदस्थ था और अब उस पर आंतरिक जांच शुरू की जा चुकी है।
एएसपी ने कहा, “वीडियो की प्रमाणिकता की जांच की जा रही है। अगर आरोपों में सच्चाई पाई गई तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी पुलिसकर्मी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।”
💰 48 लाख का दावा — सिर्फ एक महीने में
सटोरी द्वारा किए गए 48 लाख रुपये के मुनाफे के दावे ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। यदि यह दावा सही पाया गया, तो यह महादेव सट्टा एप के आर्थिक नेटवर्क और उसमें लगे पुलिस तंत्र की गंभीरता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स जैसे “महादेव सट्टा ऐप” ने सिर्फ राज्य में ही नहीं बल्कि देशभर में एक समानांतर आर्थिक तंत्र खड़ा कर दिया है। इसमें बड़े पैमाने पर काले धन का लेनदेन होता है।
🕵️♂️ महादेव सट्टा एप: क्या है पूरा मामला?
महादेव सट्टा ऐप एक ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क है, जिसे लेकर पहले भी कई गिरफ्तारियां और छापेमारी हो चुकी हैं। यह एप डिजिटल लेनदेन के माध्यम से सट्टेबाजी कराता था और बड़े पैमाने पर युवा वर्ग को इसमें फंसा रहा था।
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी इस एप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच शुरू कर दी है। छत्तीसगढ़, दिल्ली और मुंबई में कई जगहों पर रेड डाली गई थी।
⚖️ पुलिसकर्मी पर लगे आरोपों की गंभीरता:
अगर जांच में यह साबित होता है कि वाकई पुलिसकर्मी सट्टा एप से जुड़ा था और उसने आरोपी सटोरी से रकम ली है, तो उस पर IPC की भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के साथ-साथ Prevention of Corruption Act के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
इसके साथ ही पुलिस विभाग की साख पर भी सवाल खड़े होंगे और यह साबित होगा कि अपराधी केवल बाहर नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर भी हैं।
🧑💼 सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया:
फिलहाल राज्य सरकार ने इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन गृह विभाग ने रिपोर्ट तलब की है।
पुलिस मुख्यालय ने भी सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में महादेव सट्टा ऐप से जुड़े किसी भी पुलिसकर्मी या संदिग्ध की तुरंत पहचान करें और कार्रवाई करें।
📣 जनता में बढ़ता गुस्सा:
इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद आम जनता का गुस्सा भी चरम पर है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कानून के रक्षक ही ऐसे अपराधों में शामिल हैं तो न्याय की उम्मीद कैसे की जाए?
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस सुधार की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं पूरी प्रणाली पर से विश्वास खत्म करती हैं।
📌 सोचने योग्य बात:
सवाल केवल सट्टा एप का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जो अपराधी को संरक्षण देता है, उसे मुनाफा कमाने में मदद करता है, और जब बात खुलती है तो भाग लेता है।
जब तक अपराध और प्रशासन की मिलीभगत खत्म नहीं होगी, तब तक ऐसे एप्स बंद नहीं होंगे, न ही जनता को सुरक्षा और पारदर्शिता मिलेगी।


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