सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई, जिससे 12 करोड़ की लग्जरी कार अब 6 करोड़ में मिल सकेगी। भारत में विदेशी ब्रांड्स का निवेश बढ़ेगा।*
भारत में लग्जरी कारों के शौकीनों के लिए खुशखबरी है। अब देश में 12 करोड़ रुपये तक की सुपर लग्जरी कारें सिर्फ 6 करोड़ रुपये में मिल सकेंगी। यह संभव हो पाएगा केंद्र सरकार द्वारा किए गए इम्पोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर में बदलाव के चलते। सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर को बूस्ट देने के लिए सीकेडी (Completely Knocked Down) और सीबीयू (Completely Built Units) कारों पर लगने वाले टैक्स में राहत देने का फैसला किया है।
क्या है मामला?
सरकार ने हाल ही में विदेशों से आने वाली लग्जरी और सुपर लग्जरी कारों पर लगने वाले आयात शुल्क में 50% तक की कटौती की है। पहले जहां इन कारों पर 100% से भी ज्यादा टैक्स लगता था, अब वह घटकर 40-50% के बीच कर दिया गया है। इससे भारत में इन कारों की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिलेगी।
उदाहरण के लिए, एक 12 करोड़ रुपये की Bentley या Rolls-Royce जैसी कार अब 6-7 करोड़ में ही उपलब्ध हो सकती है। इससे भारत में लग्जरी कार बाजार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
सरकार की मंशा क्या है?
केंद्र सरकार का मानना है कि भारत में लग्जरी और इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। कई विदेशी कंपनियां भारत में अपना असेंबली प्लांट लगाने में रुचि दिखा रही हैं। इसीलिए, सरकार ने आयात शुल्क में राहत देकर उन्हें प्रोत्साहित करने की कोशिश की है।
इसके अलावा, इस फैसले का उद्देश्य है—
- देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना
- भारत को लक्ज़री ऑटोमोबाइल हब बनाना
- बेरोज़गारी कम करना और नए रोजगार पैदा करना
- इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात को भी प्रोत्साहन देना
कौन-कौन सी कारें होंगी सस्ती?
इस नई नीति के तहत कई हाई-एंड ब्रांड्स की गाड़ियां सस्ती होंगी, जैसे:
- Rolls-Royce Phantom, Ghost
- Bentley Continental GT
- Lamborghini Urus
- Ferrari 296 GTB
- Aston Martin DBX
- Porsche Panamera
- Mercedes-Maybach S680
- Range Rover Autobiography
- BMW XM
- Audi RS Q8
इन सभी कारों पर अब तक भारी टैक्स लगता था, जिससे इनकी कीमत दोगुनी हो जाती थी।
ऑटो एक्सपर्ट्स की राय
ऑटोमोबाइल सेक्टर के जानकारों का मानना है कि यह निर्णय लग्जरी सेगमेंट में डिमांड बढ़ा सकता है। साथ ही, विदेशी ब्रांड्स भी भारत में अपने स्टोर्स और असेंबली यूनिट लगाने के लिए ज्यादा इच्छुक होंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रे मार्केट में होने वाली गाड़ियों की बिक्री में भी कमी आएगी और लोग अब सरकारी चैनल से खरीदना पसंद करेंगे।
मध्यम वर्ग को क्या मिलेगा?
हालांकि यह निर्णय अमीर वर्ग के लिए है, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसका फायदा मिडिल क्लास को भी मिल सकता है। जैसे-जैसे भारत में सीकेडी असेंबली बढ़ेगी, कंपनियां अधिक किफायती मॉडल भी पेश कर सकती हैं। इससे हाई एंड SUV और EV सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें कम होने की संभावना बनेगी।
चुनाव और राजनीतिक संदर्भ
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार अमीर वर्ग और कारोबारी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की रणनीति भी इससे जुड़ी हो सकती है।
भविष्य की चुनौतियां
जहां एक ओर यह कदम ऑटो सेक्टर के लिए वरदान है, वहीं इससे जुड़ी कुछ चुनौतियां भी हैं:
- टैक्स रेवेन्यू में कमी आ सकती है
- मिड-सेगमेंट कार कंपनियों को असंतुलन का डर
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाय निजी वाहन प्रोत्साहन की आलोचना
निष्कर्ष
भारत में लग्जरी कारों के लिए यह सुनहरा मौका है। सरकार के इस निर्णय से न केवल कार की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का भरोसा भारत पर बढ़ेगा। आने वाले वर्षों में भारत न केवल उपभोक्ता, बल्कि लग्जरी ऑटोमोबाइल निर्माण का केंद्र बन सकता है।
