रायपुर में ‘दीदी के बखरी’ मॉडल से महिलाओं को एकीकृत कृषि और आजीविका से जोड़कर आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की पहल
रायपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘दीदी के बखरी’ मॉडल नई क्रांति लेकर आ रहा है। एकीकृत कृषि और आजीविका आधारित इस पहल के माध्यम से महिलाओं को खेती, पशुपालन, बागवानी और लघु उद्यमों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रही है। इस मॉडल के सफल होने से गांवों की आर्थिक स्थिति में सुधार और परिवारों की आय में वृद्धि देखने को मिल रही है। 🌱
क्या है ‘दीदी के बखरी’ मॉडल
‘दीदी के बखरी’ एक एकीकृत आजीविका मॉडल है, जिसमें एक ही स्थान पर कई गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसमें खेती, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, मछली पालन और खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाता है।
इस मॉडल के तहत:
- सब्जी और फल उत्पादन
- दुग्ध उत्पादन
- बकरी पालन
- मुर्गी पालन
- जैविक खाद निर्माण
जैसी गतिविधियां एक साथ संचालित की जाती हैं। इससे महिलाओं को एक से अधिक आय स्रोत मिलते हैं।
महिलाओं को मिल रहा रोजगार
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को इस मॉडल से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ ही आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इससे महिलाएं घर के पास ही रोजगार प्राप्त कर रही हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 👩🌾
बढ़ रही आय, मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
‘दीदी के बखरी’ मॉडल से जुड़ी महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। कई समूहों ने सब्जी उत्पादन, डेयरी और अन्य गतिविधियों से अच्छी आमदनी शुरू कर दी है।
इस पहल से:
- परिवार की आय बढ़ रही है
- पोषण स्तर में सुधार हो रहा है
- रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं
- महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है
प्रशासन का विशेष फोकस
छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा इस पहल को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के समूहों को चिन्हित कर उन्हें इस मॉडल से जोड़ा जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस मॉडल का विस्तार और अधिक गांवों में किया जाएगा।
पोषण और आत्मनिर्भरता पर जोर
‘दीदी के बखरी’ केवल आय का साधन नहीं बल्कि पोषण सुधार का भी माध्यम बन रहा है। घर के पास सब्जियां, दूध और अन्य उत्पाद उपलब्ध होने से परिवारों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 🥬
ग्रामीण महिलाओं की बदल रही तस्वीर
इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं। पहले जहां महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, अब वे आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी निभा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस मॉडल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और अधिक महिलाएं इससे जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं।
आगे विस्तार की तैयारी
प्रशासन द्वारा ‘दीदी के बखरी’ मॉडल को जिले के अधिक से अधिक गांवों में लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह पहल न केवल महिलाओं को सशक्त बना रही है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।


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