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चलो संगी दर्शन करबो राजीवलोचन धाम ने समां बांधा

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 2 February 2026

गरियाबंद में ‘चलो संगी दर्शन करबो राजीवलोचन धाम’ कार्यक्रम से भक्ति माहौल, लोककला व गीतों के जरिए राजीवलोचन धाम और राजिम कुंभ का संदेश दिया गया।

गरियाबंद। राजिम स्थित प्रसिद्ध राजीवलोचन धाम को लेकर जनजागरूकता और श्रद्धालुओं को आमंत्रित करने के उद्देश्य से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “चलो संगी दर्शन करबो राजीवलोचन धाम…” ने गरियाबंद में भक्तिमय माहौल बना दिया। छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति से ओत-प्रोत इस आयोजन में भजन, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राजीवलोचन धाम की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, जनप्रतिनिधि, कलाकार और श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान परिसर जयकारों और भक्ति संगीत से गूंजता रहा।

राजीवलोचन धाम की महिमा का हुआ गायन

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी बोली में राजीवलोचन धाम की महिमा का गायन किया। गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संगम, भगवान विष्णु के प्राचीन मंदिर और राजिम कुंभ कल्प की परंपरा से जोड़ा गया।

लोकगीतों में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान भी झलकती नजर आई।

छत्तीसगढ़ी लोककला ने मोहा मन

कार्यक्रम में प्रस्तुत लोकनृत्य, पंथी नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने मंच से यह संदेश दिया कि राजीवलोचन धाम केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है।

श्रद्धालुओं को राजिम कुंभ कल्प का निमंत्रण

आयोजन के माध्यम से लोगों को आगामी राजिम कुंभ कल्प में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया। कलाकारों और वक्ताओं ने बताया कि राजीवलोचन धाम में दर्शन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और पुण्य लाभ प्राप्त होता है।

कार्यक्रम का उद्देश्य जनसामान्य को राजिम और राजीवलोचन धाम से जोड़ना रहा।

युवाओं और बच्चों की रही विशेष भागीदारी

कार्यक्रम में युवाओं और बच्चों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए राजीवलोचन धाम की कहानी और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को मंच पर जीवंत कर दिया।

इससे नई पीढ़ी में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा मिला।

स्थानीय कलाकारों को मिला मंच

इस आयोजन में गरियाबंद और आसपास के क्षेत्रों के लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। कलाकारों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से लोकसंस्कृति को संरक्षण मिलता है और कलाकारों को पहचान भी मिलती है।

प्रशासन और आयोजकों का सहयोग

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया गया, जिससे दर्शकों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी इसी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

भक्तिमय माहौल में हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन सामूहिक भजन और जयकारों के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

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