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पद्मनाभस्वामी मंदिर में विराजमान हुए कटघोरा के राजा

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 28 August 2025

पद्मनाभस्वामी मंदिर में विराजे ‘कटघोरा के राजा’। हजारों श्रद्धालुओं ने किया दर्शन। छत्तीसगढ़ और केरल की आस्था का संगम, धार्मिक माहौल में गूंजे गणपति बप्पा मोरया।

केरल/छत्तीसगढ़। आस्था और भक्ति का संगम उस समय देखने को मिला जब छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गणपति ‘कटघोरा के राजा’ पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम (केरल) में विराजमान हुए। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर अपने आराध्य को नमन किया। विशेष आयोजन के तहत भगवान गणेश की यह भव्य प्रतिमा मंदिर में प्रतिष्ठित की गई, जिसे देखने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु पहुंचे।

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श्रद्धालुओं की अपार भीड़

पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। मंदिर प्रांगण में “कटघोरा के राजा” की प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों की कतारें कई किलोमीटर लंबी हो गईं। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का जयकारा लगा रहे थे।

छत्तीसगढ़ से जुड़ी आस्था

‘कटघोरा के राजा’ छत्तीसगढ़ में गणेशोत्सव के दौरान विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। स्थानीय मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस बार पहली बार प्रतिमा को केरल ले जाकर पद्मनाभस्वामी मंदिर में विराजमान किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत की संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

विशेष आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा और व्यवस्था की थी। पुलिस बल, स्वयंसेवक और मंदिर समिति के सदस्य लगातार सक्रिय रहे। श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन हो सके, इसके लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं।

धार्मिक महत्व

पंडितों और धार्मिक विद्वानों ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ और केरल की धार्मिक परंपराओं को जोड़ने वाला यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है।

भक्तों की भावनाएं

कई श्रद्धालु इस आयोजन को देखकर भावुक हो गए। छत्तीसगढ़ से आए एक भक्त ने कहा – “आज ऐसा लग रहा है मानो कटघोरा का राजा पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ रहा है।” वहीं, केरल के श्रद्धालुओं ने भी इस विशेष आयोजन की सराहना की और कहा कि यह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।

भविष्य में ऐसे आयोजनों की संभावना

मंदिर समिति और आयोजनकर्ताओं का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को और बड़े स्तर पर किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं की आस्था और आपसी भाईचारा और मजबूत होगा।


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