देवभोग में पानी से भरे गड्ढे में गिरने से तीन साल के मासूम की दर्दनाक मौत, गांव में शोक और मातम का माहौल।
छत्तीसगढ़।देवभोग ब्लॉक के एक गांव में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में तीन साल के मासूम की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्चा खेलते-खेलते पानी से भरे एक खुले गड्ढे में गिर गया, जहां डूबने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया।
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खेलते-खेलते पहुंच गया गड्ढे के पास
जानकारी के मुताबिक, यह घटना देवभोग ब्लॉक के एक छोटे से गांव [गांव का नाम] की है, जहां मासूम बच्चा अपने घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेल-खेल में वह एक खुले और गहरे पानी से भरे गड्ढे के पास पहुंच गया और अचानक फिसलकर उसमें जा गिरा।
पास में मौजूद लोगों ने जब देखा कि बच्चा नजर नहीं आ रहा है, तब खोजबीन शुरू की गई। कुछ ही देर में बच्चे का शव पानी में तैरता हुआ मिला।
परिवार में पसरा मातम
तीन साल के मासूम की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता रो-रोकर बेहाल हो गए। गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे, लेकिन मासूम की असामयिक मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही देवभोग पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता दी जाएगी।
देवभोग थाना प्रभारी ने बताया,
गांव में पानी भरे गड्ढों का संकट
गांव में निर्माण कार्य, सड़क खुदाई या बारिश के कारण ऐसे गड्ढे अक्सर बन जाते हैं, जिनमें पानी भर जाता है। सुरक्षा के अभाव में ये गड्ढे हादसों का कारण बनते हैं, खासकर बच्चों के लिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक गड्ढों को या तो भरवाया जाए या चारों ओर घेराबंदी की जाए।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
रामकुमार साहू, स्थानीय निवासी ने बताया,
सरकार और पंचायत से मांग
स्थानीय पंचायत और ग्रामीणों ने इस घटना के बाद प्रशासन से मांग की है कि गांव में जहां-जहां खुले गड्ढे हैं, वहां तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाएं। साथ ही मृतक बालक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें?
इस तरह की घटनाओं से सीख लेते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर गांवों और कस्बों में सावधानी बेहद जरूरी है।
- खुले गड्ढों की पहचान कर उन्हें भरवाया जाए
- बच्चों को खतरनाक इलाकों में खेलने से रोका जाए
- गांव स्तर पर निगरानी समितियां बनें
- प्रशासन द्वारा सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जाए
निष्कर्ष (Remedy नहीं)
देवभोग की यह घटना केवल एक गांव या एक परिवार की नहीं, बल्कि समूचे ग्रामीण भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। तीन साल के मासूम की जान यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम होते, तो बचाई जा सकती थी। अब जरूरी है कि प्रशासन चेते, और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव हो।
