रायपुर में पर्यावरण संरक्षण के साथ आय संवर्धन की पहल, पौधरोपण, महिला समूहों और युवाओं को रोजगार से जोड़कर हरित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
रायपुर। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए रायपुर जिले में अब ऐसी पहल तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जिसमें हरित संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी नागरिकों की आय बढ़ाने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार की उस नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें पर्यावरण सुरक्षा को आर्थिक विकास से जोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।
हरियाली के साथ आजीविका का मॉडल
रायपुर जिले में चल रही इस पहल के अंतर्गत पौधरोपण, सामुदायिक वन प्रबंधन, जैविक उत्पादों के संग्रहण, औषधीय पौधों की खेती और स्थानीय स्तर पर लघु वन उपज के प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे एक ओर जहां पर्यावरण को संरक्षित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल रहा है।
विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं को इन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे पर्यावरण मित्र आजीविका मॉडल के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।
स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार
अधिकारियों के अनुसार, जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अनुरूप गतिविधियों का चयन किया गया है। इनमें—
- औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती
- फलदार पौधों का रोपण और देखरेख
- पौधशाला संचालन
- जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण
- लघु वन उपज का संग्रह और मूल्य संवर्धन
जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इन सभी कार्यों से सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।
महिला समूहों को मिल रहा विशेष अवसर
इस योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को पौधशाला संचालन, बीज संग्रहण और प्राकृतिक उत्पादों की पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कई समूह अब स्थानीय बाजार में अपने उत्पाद बेचकर नियमित आय अर्जित कर रहे हैं।
महिला समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले वे केवल मौसमी मजदूरी पर निर्भर थीं, लेकिन अब उन्हें साल भर आय का अवसर मिलने लगा है।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश
पर्यावरण आधारित रोजगार मॉडल में युवाओं को भी सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें पौधरोपण तकनीक, जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है।
इससे युवाओं को अपने ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं और पलायन पर भी रोक लग रही है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ जलवायु संतुलन पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से केवल आय में वृद्धि ही नहीं होती, बल्कि क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से जलवायु संतुलन, भू-जल संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिलती है।
पौधरोपण और सामुदायिक संरक्षण से स्थानीय जल स्रोतों के पुनर्जीवन में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
विभागीय समन्वय से आगे बढ़ रही योजना
इस पहल को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है। इसमें प्रमुख भूमिका छत्तीसगढ़ वन विभाग की है, जो तकनीकी मार्गदर्शन, पौध उपलब्धता और प्रशिक्षण का कार्य कर रहा है।
इसके अलावा ग्रामीण विकास और आजीविका मिशन से जुड़े विभाग भी लोगों को समूह आधारित गतिविधियों से जोड़ने में सहयोग कर रहे हैं।
बाजार से जोड़ने की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में इन उत्पादों को स्थानीय और राज्य स्तरीय बाजार से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए गए पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बेहतर दाम मिल सकेंगे और लोगों की आय में स्थायी वृद्धि संभव होगी।
आम नागरिकों की भी भागीदारी
इस पहल के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को भी पौधरोपण एवं जागरूकता अभियानों से जोड़ा जा रहा है। नागरिकों को यह संदेश दिया जा रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है।
रायपुर शहर में भी सार्वजनिक स्थलों, कॉलोनियों और संस्थानों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भविष्य में और विस्तार की योजना
प्रशासन का कहना है कि यह पहल केवल रायपुर तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसे जिले के सभी विकासखंडों और नगरीय क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
लक्ष्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पर्यावरण आधारित आजीविका से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।
हरित विकास की ओर मजबूत कदम
पर्यावरण संरक्षण के साथ आय संवर्धन को जोड़ने की यह पहल रायपुर जिले के लिए एक नया विकास मॉडल बनकर उभर रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में यह प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।


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