इंद्रावती टाइगर रिजर्व में गिद्ध संरक्षण के सफल प्रयासों से छत्तीसगढ़ बना देश का मॉडल, विलुप्तप्राय गिद्धों की आबादी में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि।
रायपुर। छत्तीसगढ़ ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। राज्य का इंद्रावती टाइगर रिजर्व गिद्ध संरक्षण के सफल प्रयासों के कारण देशभर में मॉडल के रूप में उभरा है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की संख्या बढ़ाने और उनके सुरक्षित आवास को सुनिश्चित करने के लिए यहां अपनाई गई रणनीतियां अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और सामुदायिक स्तर पर एकीकृत प्रयास किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित सर्वे, सुरक्षित घोंसला स्थलों की पहचान, भोजन उपलब्धता सुनिश्चित करना और जहरीली दवाओं के उपयोग पर निगरानी जैसे कदम उठाए गए। विशेष रूप से डाइक्लोफेनाक जैसी पशु औषधियों पर नियंत्रण से गिद्धों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
वन अधिकारियों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की आबादी में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता के बिना संभव नहीं थी। ग्रामीणों को जागरूक कर मृत पशुओं के सुरक्षित निपटान और गिद्धों के लिए भोजन स्थलों के संरक्षण में जोड़ा गया। इससे मानव-वन्यजीव सहयोग का एक सकारात्मक मॉडल विकसित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे मृत पशुओं को साफ कर बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में किए गए प्रयासों से न केवल जैव विविधता को मजबूती मिली है, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी बेहतर हुआ है।
राज्य सरकार और वन विभाग का लक्ष्य अब इस मॉडल को छत्तीसगढ़ के अन्य संरक्षित क्षेत्रों में लागू करना है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों के साथ समन्वय कर इंद्रावती के अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जा रहा है।
गिद्ध संरक्षण में मिली इस सफलता ने छत्तीसगढ़ को पर्यावरण संरक्षण के मानचित्र पर नई ऊंचाई दी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व अब केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि गिद्धों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी देशभर में एक मिसाल बन चुका है।





अपनी प्रतिक्रिया दें