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छत्तीसगढ़ दवा घोटाले में IAS से फिर पूछताछ

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 4 August 2025

411 करोड़ के दवा घोटाले में ईडी फिर करेगी IAS अधिकारियों से पूछताछ, मुख्य आरोपी समेत 7 पहले ही जेल में, जल्द नोटिस जारी होगा।

रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दवा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। ईडी अब इस मामले से जुड़े वरिष्ठ IAS अधिकारियों से दोबारा पूछताछ करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को जल्द ही समन भेजा जा सकता है। यह घोटाला करीब 411 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है, जिसमें राज्य के स्वास्थ्य विभाग में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।

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मुख्य आरोपी समेत 7 आरोपी जेल में

इस घोटाले में मुख्य आरोपी सहित 7 आरोपी पहले ही न्यायिक हिरासत में हैं। इसमें कुछ स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अधिकारी, ठेकेदार और सप्लाई चेन से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं। ईडी ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया था कि घोटाले के पैसे को हवाला और फर्जी कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाया गया।

कैसे हुआ घोटाला?

यह मामला कोविड काल के दौरान राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर की गई खरीद-फरोख्त से जुड़ा है।

  • अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भारी मात्रा में दवाएं, मेडिकल उपकरण और PPE किट्स की खरीदी की गई थी।
  • लेकिन जांच में पाया गया कि कई दवाएं या तो अवांछित कीमतों पर खरीदी गईं या घटिया गुणवत्ता की थीं।
  • वहीं कुछ सप्लायर कंपनियां कागजों पर ही अस्तित्व में थीं, जिनके माध्यम से पैसे निकाले गए।

आईएएस अधिकारियों पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, ED जिन IAS अधिकारियों से पूछताछ करना चाहती है, वे उस समय स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा सेवाएं एवं प्रशासन से जुड़े उच्च पदों पर तैनात थे।
इन अधिकारियों पर संदेह है कि उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की और घोटाले के संचालन की अनुमति दी। कुछ मामलों में इनके हस्ताक्षर वाली फाइलें भी बरामद की गई हैं।

ईडी के पास क्या-क्या सबूत?

  • बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड: ईडी के पास आरोपियों के बैंक खातों से की गई संदिग्ध ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड है।
  • व्हाट्सऐप चैट और ईमेल: बातचीत के डिजिटल साक्ष्य जिनसे पता चलता है कि कैसे फर्जी इनवॉइस बनाए गए।
  • फर्जी कंपनियों के दस्तावेज: जांच में सामने आया कि सप्लाई देने वाली कुछ कंपनियों ने सिर्फ घोटाले के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि यह एक सुनियोजित लूट थी जिसमें सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार किया गया।
पूर्व मंत्रियों और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से कहा गया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

ईडी की अगली रणनीति

  • ईडी अब बयानात्मक विरोधाभासों की जांच कर रही है।
  • जिन अधिकारियों ने पहले बयान दिया था, अब उनसे नए साक्ष्यों के आधार पर दोबारा पूछताछ की जाएगी।
  • फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है जिसमें खरीदी और सप्लाई के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा।

नोटिस और समन जल्द

ईडी जल्द ही संबंधित आईएएस अधिकारियों को धारा 50 के तहत समन भेज सकती है। इसमें पूछताछ के लिए उन्हें दिल्ली या रायपुर ऑफिस में पेश होने को कहा जाएगा।
यह पूछताछ अगस्त के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है।

जनता में नाराज़गी

जनता के बीच इस घोटाले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि महामारी जैसे संकट में भी भ्रष्टाचार करने वाले देश और समाज दोनों के दुश्मन हैं।
सोशल मीडिया पर भी ‘दवा घोटाला’ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है और लोग आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं।

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