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उदंती–सीतानदी में हॉर्नबिल संरक्षण की पहल

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 11 February 2026

उदंती–सीतानदी में दुर्लभ हॉर्नबिल संरक्षण हेतु प्राकृतिक उद्यान विकसित हो रहे हैं, जिससे जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय सहभागिता और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से समृद्ध उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दुर्लभ हॉर्नबिल पक्षी के संरक्षण और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्राकृतिक उद्यान विकसित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य हॉर्नबिल की घटती संख्या को रोकना, उसके प्रजनन क्षेत्र को संरक्षित करना तथा स्थानीय समुदाय को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ना है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हॉर्नबिल को वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेतक प्रजाति माना जाता है। यह पक्षी जंगलों में बीज प्रसार (सीड डिस्पर्सल) में अहम भूमिका निभाता है, जिससे वनों की प्राकृतिक पुनरुत्पत्ति होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उदंती–सीतानदी क्षेत्र में ऐसे प्राकृतिक उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जहां हॉर्नबिल के लिए अनुकूल वृक्ष प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है।

प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर विशेष जोर

प्राकृतिक उद्यानों में विशेष रूप से उन पेड़-पौधों को लगाया जा रहा है, जिनके फल हॉर्नबिल का प्रमुख आहार होते हैं। इसके साथ ही घोंसला बनाने योग्य पुराने और ऊंचे पेड़ों की पहचान कर उन्हें संरक्षित किया जा रहा है, ताकि हॉर्नबिल बिना किसी व्यवधान के प्रजनन कर सकें।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी

इस परियोजना में आसपास के गांवों के ग्रामीणों, वन समितियों और स्वयंसेवी संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीणों को हॉर्नबिल संरक्षण के महत्व, वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध कटाई रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इससे संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को आजीविका के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल

उदंती–सीतानदी क्षेत्र पहले से ही दुर्लभ वन्य प्रजातियों के लिए जाना जाता है। अब हॉर्नबिल संरक्षण के लिए विकसित किए जा रहे प्राकृतिक उद्यान इस रिजर्व की जैव विविधता को और मजबूत करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इससे हॉर्नबिल की संख्या में स्थिरता और वृद्धि देखने को मिलेगी।

पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता का केंद्र

प्राकृतिक उद्यानों को पर्यावरण शिक्षा केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों को हॉर्नबिल सहित अन्य पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।

पर्यटन और संरक्षण का संतुलन

वन विभाग का लक्ष्य है कि इन प्राकृतिक उद्यानों को इस तरह विकसित किया जाए, जिससे नियंत्रित और जिम्मेदार इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिले, लेकिन हॉर्नबिल और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

दुर्लभ हॉर्नबिल के संरक्षण के लिए उदंती–सीतानदी में विकसित हो रहे प्राकृतिक उद्यान न केवल पक्षी संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ में सतत पर्यावरण संरक्षण मॉडल के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

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