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सेवा कर रिफंड पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 27 December 2025

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवा कर रिफंड पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि गलत वसूली गई कर राशि करदाता को लौटाना विभाग की अनिवार्य जिम्मेदारी है।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवा कर (Service Tax) रिफंड को लेकर एक ऐतिहासिक और करदाताओं के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि करदाता से अवैध या गलत तरीके से सेवा कर वसूला गया है, तो विभाग को वह राशि अनिवार्य रूप से लौटानी होगी। इस फैसले से न केवल व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिली है, बल्कि कर प्रशासन की जवाबदेही भी तय हुई है।


क्या है पूरा मामला

यह मामला एक निजी कंपनी द्वारा सेवा कर की वापसी को लेकर दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उससे जिस सेवा पर टैक्स वसूला गया, वह सेवा कर के दायरे में ही नहीं आती थी। बावजूद इसके कर विभाग ने कर की वसूली की और बाद में रिफंड देने से इनकार कर दिया।

इस पर कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कर विभाग ने नियमों की गलत व्याख्या कर सेवा कर वसूला था।


हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि—

“यदि किसी करदाता से कानून के विपरीत कर वसूला गया है, तो विभाग का यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह संपूर्ण राशि उसे वापस करे।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिफंड में अनावश्यक देरी करना या तकनीकी आधार पर रिफंड रोकना असंवैधानिक है।


ब्याज सहित राशि लौटाने के निर्देश

कोर्ट ने कर विभाग को निर्देश दिए कि करदाता को न केवल रिफंड की राशि लौटाई जाए, बल्कि निर्धारित अवधि में ऐसा न करने पर ब्याज भी अदा किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सरकारी विभाग यह मानकर नहीं चल सकते कि करदाता लंबी कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेगा।


करदाताओं के लिए बड़ी राहत

इस फैसले को टैक्स मामलों के जानकार करदाताओं के अधिकारों की बड़ी जीत मान रहे हैं। विशेष रूप से उन व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं को राहत मिलेगी, जिनसे जीएसटी से पहले के दौर में सेवा कर वसूला गया था और जिनके रिफंड अब तक लंबित थे।


विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान विभागीय लापरवाही पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि कर प्रशासन को पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए, न कि करदाताओं को परेशान करने वाला रवैया अपनाना चाहिए।


पुराने मामलों पर भी पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर उन सभी मामलों पर पड़ेगा, जिनमें सेवा कर या अन्य अप्रत्यक्ष करों की गलत वसूली हुई है। अब करदाता इस फैसले का हवाला देकर अपने रिफंड के लिए दावा मजबूत कर सकेंगे।


वकीलों की प्रतिक्रिया

वरिष्ठ कर अधिवक्ताओं का कहना है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 265—“बिना कानून के कोई कर नहीं”—की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भविष्य में कर विभाग को मनमानी से रोकेगा।


व्यापार जगत में सकारात्मक संदेश

उद्योग संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे व्यापारिक माहौल में भरोसा बढ़ेगा। करदाता अब खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे और कानूनी रूप से अपने अधिकारों की मांग कर सकेंगे।


आगे क्या

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद संभावना है कि कर विभाग अपनी रिफंड प्रक्रिया की समीक्षा करेगा और लंबित मामलों का निपटारा तेज़ी से किया जाएगा। वहीं, करदाताओं को भी सलाह दी गई है कि वे अपने पुराने सेवा कर मामलों की जांच कर आवश्यकतानुसार दावा प्रस्तुत करें।

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