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हाईकोर्ट की फटकार, कहा – कोई समाज संविधान से

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 5 August 2025

हाईकोर्ट ने DSP परिवार के बहिष्कार पर फटकार लगाई, कहा – समाज संविधान से ऊपर नहीं, पदाधिकारियों को चेतावनी और कानूनी कार्रवाई की संभावना।

रायपुर, छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने समाज के एक वर्ग द्वारा एक पुलिस अधिकारी (DSP) के परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने पर सख्त नाराजगी जताई है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी समाज या संगठन संविधान से ऊपर नहीं हो सकता और इस तरह की कार्रवाइयाँ न केवल असंवैधानिक हैं, बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी हैं।

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घटना का विवरण:

प्रकरण में बताया गया कि एक DSP के परिवार को उनके समाज के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से बहिष्कृत कर दिया। आरोप है कि पारिवारिक विवाद या सामाजिक रीति-रिवाजों से जुड़े कारणों के चलते यह बहिष्कार किया गया। इससे न केवल पीड़ित परिवार को सामाजिक तौर पर अपमान और अलगाव का सामना करना पड़ा, बल्कि मानसिक और आर्थिक तनाव भी झेलना पड़ा।

याचिका पर सुनवाई:

DSP के परिवार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया कि समाज के कुछ पदाधिकारियों ने दबाव डालकर अन्य सदस्यों को उनके साथ संबंध खत्म करने के लिए बाध्य किया।

याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए समाज के नेताओं को तलब किया और पूछा कि किस आधार पर उन्होंने संविधान के विरुद्ध जाकर किसी का बहिष्कार किया।

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी:

न्यायमूर्ति ने सुनवाई के दौरान कहा:

“भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है। कोई भी संस्था, संगठन या समाज इस पर निर्णय नहीं ले सकता कि कौन किससे मेल-जोल रखेगा और किसे सामाजिक रूप से अलग किया जाएगा।”

कानूनी विशेषज्ञों की राय:

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला “Right to Life with Dignity” के सीधे उल्लंघन के अंतर्गत आता है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है, जिसमें सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा भी शामिल है।

आगे की कार्रवाई:

हाईकोर्ट ने समाज के पदाधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए आगामी सुनवाई में विस्तृत स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। यदि समाज के लोगों की भूमिका गलत पाई गई, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया:

DSP के परिवार ने अदालत के इस हस्तक्षेप को राहत बताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अब उन्हें सामाजिक न्याय मिलेगा और वह सामान्य जीवन जी सकेंगे।

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