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हाईकोर्ट ने साहू संघ चुनाव पर रोक लगाई

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 1 August 2025

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के चुनाव पर अंतरिम रोक लगाई, 5 अगस्त को अगली सुनवाई में चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर होगी सुनवाई।

रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश साहू संघ के आगामी चुनावों पर अंतरिम रोक लगा दी है। चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने चुनाव स्थगित करने का आदेश जारी किया और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 5 अगस्त 2025 तय की है।

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यह मामला प्रदेश साहू संघ, जो कि राज्य में साहू समाज का प्रमुख प्रतिनिधि संगठन है, से संबंधित है। संघ के भीतर चुनावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा था और अब यह कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।


क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के आगामी चुनावों की घोषणा हाल ही में की गई थी। चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही कई जिलों और कार्यकर्ताओं की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, भेदभावपूर्ण उम्मीदवार चयन, और पूर्वगामी नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए।

इन आरोपों के चलते कुछ सदस्यों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि चुनाव प्रक्रिया में संघ के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन किया गया है।


हाईकोर्ट की अंतरिम टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा कि संगठनात्मक चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सदस्यता की समान भागीदारी अनिवार्य है। जब तक इन मुद्दों पर न्यायालय संतुष्ट नहीं होता, तब तक चुनाव कराना उचित नहीं होगा।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी और 5 अगस्त को अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की है, जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।


याचिकाकर्ताओं की मांगें क्या हैं?

याचिकाकर्ता सदस्यों का कहना है कि:

  • चुनाव कार्यक्रम तय करने से पहले समस्त सदस्यों को सूचना नहीं दी गई।
  • निष्पक्ष चुनाव आयोग का गठन नहीं किया गया।
  • कार्यकारिणी के कुछ सदस्य अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर अपने करीबी उम्मीदवारों को बढ़ावा दे रहे हैं।

वे मांग कर रहे हैं कि या तो पूरे चुनाव को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष प्रक्रिया शुरू की जाए या अदालत द्वारा पर्यवेक्षित समिति के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कराई जाए।


साहू समाज में बढ़ी हलचल

हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद साहू समाज के भीतर राजनीतिक गतिविधियां और चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। कई वरिष्ठ सदस्यों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और पारदर्शी चुनाव की आवश्यकता को दोहराया है। वहीं कुछ धड़े इस निर्णय को संगठन के स्वायत्त अधिकारों में हस्तक्षेप मान रहे हैं।


संघ की प्रतिक्रिया

संघ के पदाधिकारियों ने अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं जारी किया है। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि संघ की वर्तमान कार्यकारिणी इस मामले को कानूनी तरीके से निपटाने की रणनीति बना रही है। संघ के अधिवक्ता 5 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करेंगे।


भविष्य की दिशा क्या होगी?

अब 5 अगस्त को कोर्ट यह तय करेगा कि चुनाव प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। यदि अदालत को प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं दिखती हैं, तो चुनाव पूरी तरह रद्द हो सकते हैं या फिर विशेष निगरानी समिति नियुक्त कर दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं।

यह फैसला न केवल साहू संघ बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य सामाजिक संगठनों के लिए भी नज़ीर बन सकता है कि कैसे संगठनात्मक चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित किया जाए।

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