हाईकोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन में लापरवाही पर नाराजगी जताई, परिवहन सचिव को उपस्थित होने का आदेश, आम नागरिकों के लिए सुधार की मांग तेज।
रायपुर: राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में लगातार लापरवाही और प्रशासनिक कोताही के मामलों को लेकर उच्च न्यायालय ने गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। एक जनहित याचिका के आधार पर अदालत ने परिवहन विभाग से विस्तृत जवाब तलब किया और परिवहन सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया।
Read it loud
याचिका में दावा किया गया कि कई रूटों पर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों की समय पर उपलब्धता नहीं हो रही है। इसके चलते आम नागरिक, विशेषकर छात्र और कामकाजी लोग, दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वाहन संचालन के अभाव में लोग निजी वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे सड़क पर ट्रैफिक बढ़ रहा है और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
हाईकोर्ट ने शासन द्वारा पेश किए गए हलफनामे में खामियों और अपर्याप्त जानकारी की ओर ध्यान दिलाया। न्यायालय ने सवाल उठाया कि विभाग ने परिवहन व्यवस्था सुधारने और समय पर बस सेवा सुनिश्चित करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए हैं। अदालत ने साफ किया कि केवल कागजों में विवरण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक सुधार और प्रभावी कार्यान्वयन जरूरी है।
अदालत ने परिवहन सचिव को निर्देश दिया कि वे अगले सुनवाई तक पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों और राज्य के सार्वजनिक परिवहन के संचालन और सुधार के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करें। न्यायालय ने कहा कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो विभाग और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति में सुधार के लिए सख्त निगरानी और समय पर निगरानी रिपोर्टिंग आवश्यक है। हाईकोर्ट की नाराजगी इस दिशा में सरकार और विभाग के लिए चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
याचिका में यह भी उल्लेख है कि ग्रामीण और सुदूर इलाकों में परिवहन की कमी के कारण लोग गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े आवश्यक कार्यों में देरी हो रही है, जो सीधे आम जनता के जीवन पर असर डाल रही है।
हाईकोर्ट की इस प्रतिक्रिया के बाद सरकार और परिवहन विभाग पर सुधारात्मक दबाव बढ़ गया है। आम नागरिक और यात्री संगठन भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएं।
राज्य सरकार ने अब तक की कार्रवाइयों का विवरण प्रस्तुत किया है, जिसमें नए बसों की खरीद, रूट मैपिंग और समय-सारणी में सुधार के प्रयास शामिल हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल प्रयासों का विवरण ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिणाम भी दिखाई देने चाहिए।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है, जिसमें परिवहन सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में आवश्यक सुधार शीघ्र ही लागू होंगे।
