हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एकमात्र मेंटल हॉस्पिटल में अव्यवस्था पर नाराजगी जताई, स्वास्थ्य सचिव को पूरी रिपोर्ट पेश करने और सुधारात्मक कदम उठाने के दिए आदेश।
छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में गंभीर अव्यवस्था उजागर हुई है। प्रदेश के एकमात्र मेंटल हॉस्पिटल की खराब व्यवस्था और अनियमित संचालन ने उच्च न्यायालय का ध्यान खींचा। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताई और स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिया कि वह पूरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें।
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अस्पताल की वर्तमान स्थिति
अस्पताल में कई दिनों से भर्ती मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिल रही है। बुनियादी सुविधाओं की कमी, पर्याप्त स्टाफ की अनुपस्थिति और दवाओं की अनियमित आपूर्ति ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। शिकायतों के अनुसार अस्पताल में सफाई, सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था भी असंतोषजनक है।
अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि स्टाफ की कमी और अत्यधिक मरीजों की संख्या कारण हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रदेश के लोगों को उचित मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।
हाईकोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लापरवाही गंभीर अपराध के बराबर है। न्यायालय ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया कि वे 15 दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें, जिसमें अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्टाफ की स्थिति, मरीजों की संख्या और सुधारात्मक उपायों की पूरी जानकारी शामिल हो।
जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई, तो अदालत कड़ी कार्रवाई करने से भी नहीं चूकेगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मानसिक रोगियों के लिए यह अस्पताल उनकी अंतिम आशा है और उनके स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अस्पताल में सुधार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग ने कहा कि नए स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही अस्पताल में नई सफाई और सुरक्षा टीमों की तैनाती की जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. अनिल वर्मा ने कोर्ट में कहा कि विभाग मरीजों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी रिपोर्ट में सभी सुधारात्मक उपायों की जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में मानसिक रोगियों के लिए केवल एक अस्पताल होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिक मेंटल हॉस्पिटल और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र राज्यभर में स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता और नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
मरीज और परिजनों की चिंता
अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजन भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इलाज के दौरान पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार दवाओं की कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है।
परिजन राधा कुमारी ने कहा,
“हमारे लिए यह अस्पताल आखिरी उम्मीद है। लेकिन अगर यहां ठीक से इलाज नहीं हुआ, तो हमें कहां जाना चाहिए?”
सुधार की दिशा में कदम
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि उन्होंने अस्पताल में सुधार के लिए तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए हैं। विभाग ने अस्पताल में डिजिटल रिकॉर्डिंग, नियमित स्टाफ मीटिंग और मरीजों के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। इसके अलावा नई भर्ती और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि मरीजों को बेहतर देखभाल मिल सके।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को न केवल रिपोर्ट पेश करनी है, बल्कि अस्पताल की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम भी उठाने होंगे। न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि सुधारात्मक कार्रवाई समय पर नहीं हुई, तो अदालत कठोर कदम उठाने में संकोच नहीं करेगी।
