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NHM हड़ताल पर स्वास्थ्य मंत्री ने दिया बड़ा बयान

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 30 August 2025


स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव जायसवाल ने NHM कर्मचारियों की हड़ताल पर कहा कि सरकार का रुख सख्त रहेगा और ‘नो वर्क, नो पे’ नियम लागू होगा।


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रायपुर।नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारियों की लंबे समय से चल रही हड़ताल पर छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है। इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार ‘नो वर्क, नो पे’ (No Work, No Pay) नीति पर अडिग है और जो कर्मचारी काम पर नहीं लौटेंगे, उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा।

हड़ताल का असर

NHM कर्मचारियों की हड़ताल के चलते प्रदेश में कई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट और भी गहरा हो गया है। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की कई योजनाएं ठप पड़ चुकी हैं। मरीजों को समय पर इलाज न मिलने से आम जनता परेशान है।

मंत्री का सख्त रुख

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने हड़ताली कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा—
“सरकार ने उनकी मांगों को पहले भी सुना है और कई बार सकारात्मक कदम उठाए हैं। लेकिन बार-बार हड़ताल करना जनता के साथ खिलवाड़ है। ऐसे में सरकार ‘नो वर्क, नो पे’ की नीति अपनाने के लिए बाध्य है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकती।

कर्मचारियों की मांग

NHM कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण, स्थाई नियुक्ति और वेतन वृद्धि जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें अस्थायी अनुबंध पर रखा गया है, जिससे नौकरी की स्थिरता नहीं है। इसके अलावा अन्य राज्यों की तुलना में उन्हें कम वेतन मिल रहा है।

सरकार का पक्ष

सरकार का मानना है कि मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन एकदम से सभी को स्थायी करना संभव नहीं है। साथ ही राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए वेतन वृद्धि पर तुरंत फैसला लेना कठिन है। मंत्री जायसवाल ने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता है, लेकिन हड़ताल का रास्ता जनता को नुकसान पहुंचाने वाला है।

मरीजों पर असर

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और बस्तर समेत कई जिलों में मरीजों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में प्रसव सेवाएं प्रभावित होने से महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। वहीं टीकाकरण अभियान और बच्चों की स्वास्थ्य जांच पर भी असर पड़ा है।

विपक्ष का आरोप

विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि समय रहते कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी गईं, जिसके कारण हड़ताल का हालात बना। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को संवेदनशील होकर निर्णय लेना चाहिए ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

आगे की राह

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तो उनकी सेवा समाप्त करने पर भी विचार किया जाएगा। सरकार वैकल्पिक व्यवस्था कर रही है ताकि आपातकालीन सेवाएं बाधित न हों।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हड़तालें राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को कमजोर करती हैं। सरकार और कर्मचारियों दोनों को बातचीत से हल निकालना चाहिए ताकि जनता को परेशानी न हो।


👉 कुल मिलाकर, NHM कर्मचारियों की हड़ताल ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को संकट में डाल दिया है। सरकार का रुख सख्त है और ‘नो वर्क, नो पे’ की नीति लागू होने से स्थिति और भी तनावपूर्ण हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत से कोई समाधान निकलता है या टकराव और बढ़ता है।


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