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तिल्दा-नेवरा में पेटीएम अपडेट के नाम पर ठगी

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 4 August 2025

तिल्दा-नेवरा में ठेला व्यापारी से पेटीएम अपडेट के बहाने 80 हजार की साइबर ठगी, पुलिस जांच में जुटी, साइबर सुरक्षा पर सवाल।

तिल्दा-नेवरा।छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा कस्बे में एक ठेला व्यापारी साइबर ठगों का शिकार बन गया। पेटीएम अपडेट करने के नाम पर जालसाजों ने उसके बैंक खाते से ₹80,000 की ठगी कर ली। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल की मदद से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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क्या है पूरा मामल

पीड़ित व्यापारी रामप्रसाद वर्मा, जो तिल्दा-नेवरा के मुख्य बाज़ार में फल का ठेला लगाता है, ने बताया कि हाल ही में उसके पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को पेटीएम का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि “आपका पेटीएम वॉलेट अपडेट नहीं हुआ है, तुरंत अपडेट न किया गया तो सेवा बंद हो जाएगी।

कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने रामप्रसाद को एक लिंक भेजा और उसे क्लिक करने के लिए कहा। रामप्रसाद ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया और दिए गए निर्देशों का पालन किया, उसके मोबाइल पर बैंक से ₹80,000 की निकासी का मैसेज आ गया।

एकाउंट से उड़ाए गए पूरे दिन की कमाई के पैसे

रामप्रसाद ने बताया कि यह पैसा उसकी कई दिन की बिक्री और मेहनत की बचत थी। साइबर ठगों ने उसका खाता खाली कर दिया। जैसे ही उसे ठगी का अहसास हुआ, उसने तुरंत तिल्दा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच में जुटी, साइबर सेल से संपर्क

पुलिस ने मामला दर्ज कर आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर और ट्रांजैक्शन डिटेल के आधार पर साइबर सेल की मदद से आगे की जांच की जा रही है।

पेटीएम की ओर से चेतावनी

इस तरह की घटनाएं देशभर में बढ़ रही हैं। पेटीएम और अन्य डिजिटल वॉलेट कंपनियां बार-बार चेतावनी दे रही हैं कि वे कभी भी फोन करके किसी यूजर से पासवर्ड, ओटीपी या लिंक पर क्लिक करने के लिए नहीं कहतीं।

डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामले

छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में डिजिटल ठगी के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है। विशेषकर छोटे व्यापारियों, ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों और कम डिजिटल जागरूकता वाले लोग सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

पुलिस की अपील

तिल्दा पुलिस ने आमजन से अपील की है:

  • किसी अनजान कॉलर की बातों में न आएं।
  • किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसे वेरिफाई करें।
  • बैंक या वॉलेट से जुड़ी जानकारी किसी को न दें।
  • ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

पीड़ित व्यापारी की हालत गंभीर

ठगी का शिकार हुए रामप्रसाद मानसिक तनाव में है। उसका कहना है कि उसने त्योहारों के लिए सामान मंगवाया था और अब पूरा पैसा चला गया। उसकी रोज़मर्रा की कमाई पर भी असर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

डिजिटल लेन-देन में सावधानी ज़रूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान में सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी सेवा का अपडेट, बंद या वेरिफिकेशन सिर्फ संबंधित ऐप्स के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि कॉल या एसएमएस लिंक के ज़रिए।

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