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पूर्व सहायक आयुक्त DMF फंड घोटाले में गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 25 August 2025

आदिवासी विकास विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त गिरफ्तार, 45 फर्जी टेंडर निकालकर DMF फंड में करोड़ों की गड़बड़ी, क्लर्क फरार, जांच जारी।

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास विभाग में घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के दो पूर्व सहायक आयुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने 45 फर्जी टेंडर जारी कर जिला खनिज विकास निधि (District Mineral Foundation – DMF) फंड में करोड़ों की गड़बड़ी की। इस मामले की जांच के दौरान एक क्लर्क फरार बताया गया है, जिसे अब पकड़ने के प्रयास जारी हैं।

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जानकारी के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग के पूर्व सहायक आयुक्तों ने सरकारी निधियों का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर फर्जी टेंडर निकाले। जांच में पाया गया कि ये टेंडर केवल कागजों तक ही सीमित थे और वास्तविक निर्माण या कार्य नहीं हुआ। इस प्रकार के घोटाले से DMF फंड के करोड़ों रुपये गलत हाथों में चले गए।

जांच अधिकारियों ने बताया कि फर्जी टेंडरों के माध्यम से यह राशि विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर की गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों पूर्व अधिकारियों ने बड़ी सावधानी से घोटाले को अंजाम दिया, लेकिन विभागीय और सरकारी सतर्कता से उनका जाल फुल हुआ।

पुलिस और विशेष जांच दल ने दोनों पूर्व सहायक आयुक्तों को उनके निवास स्थान से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी बरामद किए गए, जो फर्जी टेंडरों और DMF फंड में किए गए गड़बड़ी के प्रमाण हैं। अधिकारीयों का कहना है कि इस मामले में क्लर्क जो कि कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता का सहयोगी था, अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए सभी थानों और एयरपोर्ट पर सतर्कता बरती जा रही है।

वहीं, आदिवासी विकास विभाग ने मीडिया को बताया कि विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं। विभाग ने दावा किया कि आने वाले समय में सभी निधियों का ट्रैकिंग सिस्टम डिजिटल माध्यम से किया जाएगा ताकि इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो।

विशेष जांच दल (SIT) ने बताया कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आदिवासी समुदाय के लिए बनाए गए विकास कार्यों और योजनाओं में भी बाधा आई। DMF फंड का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क निर्माण और रोजगार के अवसर प्रदान करना है। ऐसे घोटाले से योजनाओं का कार्य प्रभावित होता है और लाभार्थियों को नुकसान पहुंचता है।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को इस प्रकार के फर्जी टेंडरों या भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी हो, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। जांच अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि फरार क्लर्क की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का पूरा नेटवर्क सामने आएगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है और राज्य के सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी अधिकारी को आदिवासी कल्याण और सरकारी निधियों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस मामले में अब तक दर्ज प्राथमिकी में दोनों पूर्व सहायक आयुक्तों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाये गए हैं, और उनके खिलाफ आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार और सरकारी दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने का केस दर्ज किया गया है।

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