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फोरेंसिक वैन खरीदीं, जिलों तक नहीं पहुंचीं

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 28 April 2026

रायपुर में फोरेंसिक वैन जिलों तक नहीं पहुंचीं, 21 करोड़ खर्च के बावजूद जांच में देरी, 3 दिन की रिपोर्ट अब चार हफ्तों में मिल रही

रायपुर। साइबर अपराधों की जांच को तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य में 21 करोड़ रुपए खर्च कर 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदी गईं, लेकिन इनका लाभ जिलों तक नहीं पहुंच पाने से पूरा सिस्टम प्रभावित हो रहा है। वैन के उपयोग में देरी के कारण रायपुर पर जांच का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

स्थिति यह है कि जिन मामलों की रिपोर्ट 3 दिन में आ जानी चाहिए, उनमें अब चार हफ्तों तक का समय लग रहा है।

करोड़ों की वैन, लेकिन उपयोग अधूरा

सरकार द्वारा आधुनिक तकनीक से लैस 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदी गई थीं।

इनका उद्देश्य था:

  • साइबर अपराधों की त्वरित जांच
  • डिजिटल साक्ष्य का मौके पर विश्लेषण
  • जिलों में जांच प्रक्रिया को आसान बनाना

लेकिन वैन अब तक कई जिलों में तैनात नहीं हो सकी हैं। 🚐

रायपुर पर बढ़ा दबाव

वैन के जिलों में नहीं पहुंचने के कारण अधिकांश मामलों की जांच रायपुर में ही की जा रही है।

परिणाम:

  • जांच लंबित मामलों की संख्या बढ़ी
  • विशेषज्ञों पर काम का दबाव
  • रिपोर्ट में देरी

रिपोर्ट में हो रही देरी

जहां पहले फोरेंसिक रिपोर्ट 3 दिनों में मिल जाती थी, वहीं अब इसमें चार हफ्तों तक का समय लग रहा है।

इससे:

  • जांच प्रक्रिया धीमी
  • अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी
  • पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा

तकनीक का पूरा लाभ नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि वैन का सही उपयोग नहीं होने से आधुनिक तकनीक का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

प्रशासनिक चुनौतियां

सूत्रों के अनुसार:

  • स्टाफ की कमी
  • संचालन संबंधी समस्याएं
  • तैनाती में देरी

ये कारण वैन के उपयोग में बाधा बन रहे हैं।

सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि:

  • वैन को जल्द जिलों में भेजा जाए
  • प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति हो
  • जांच प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया जाए

जनता पर असर

इस देरी का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है, खासकर साइबर अपराध के मामलों में पीड़ितों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में 21 करोड़ रुपए खर्च कर खरीदी गई मोबाइल फोरेंसिक वैन का पूरा उपयोग नहीं हो पाने से जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो साइबर अपराधों की जांच और अधिक प्रभावित हो सकती है।

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