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छत्तीसगढ़ सड़क घोटाला: पीडब्ल्यूडी के पांच अधिकारी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 30 July 2025

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से किए जा रहे सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों के चलते PWD के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इन अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के कामों में भारी घोटाला किया।

यह कार्रवाई सरकार द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत की गई है, जिसके बाद अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच शुरू हो गई है। गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में अवर अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं।

घटिया निर्माण की शिकायत पर शुरू हुई जांच

मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की कि बन रही सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी हैं। जांच के आदेश दिए गए और तकनीकी रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निर्माण मापदंडों की अनदेखी की गई, जिससे सड़क की उम्र प्रभावित हुई।

भारी वित्तीय अनियमितता का आरोप

लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्यों में लगभग ₹20 करोड़ की लागत दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक खर्च और गुणवत्ता इससे काफी कम पाई गई। फर्जी बिलिंग, फर्जी माप पुस्तिकाएं (Measurement Books) और बिना निरीक्षण के भुगतान जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।

गिरफ्तार अधिकारियों के नाम

जिन पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें ये प्रमुख नाम शामिल हैं:

  1. आर.के. वर्मा – अधीक्षण अभियंता
  2. एस.एन. साहू – कार्यपालन अभियंता
  3. विनीत तिवारी – उप अभियंता
  4. रमेश कुमार – अवर अभियंता
  5. राजीव श्रीवास्तव – लेखाधिकारी

इन सभी अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।

ठेकेदारों से सांठगांठ का भी आरोप

सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने सड़क निर्माण का ठेका कुछ खास कंपनियों को दिया था, जिनके साथ पहले से सेटिंग थी। ठेकेदारों ने नकली मटेरियल का उपयोग किया और निर्धारित मात्रा से कम सामग्री का उपयोग कर बड़ी राशि निकाली। बदले में अधिकारियों को कमीशन दिया गया।

सरकार की सख्त प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो PWD के अन्य प्रोजेक्ट्स की भी जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

लोकायुक्त और एसीबी भी सक्रिय

मामला सामने आने के बाद लोकायुक्त और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी सक्रियता दिखाते हुए जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

भविष्य की कार्रवाई

पुलिस ने कोर्ट में आरोपियों को पेश कर 5 दिन की रिमांड पर लिया है ताकि पूछताछ में घोटाले की गहराई तक पहुंचा जा सके। साथ ही संबंधित ठेकेदारों और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अगर और सबूत मिलते हैं, तो और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

निष्कर्ष नहीं, लेकिन सवाल जरूर

यह मामला छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। क्या सिर्फ गिरफ्तारी से व्यवस्था सुधरेगी? या सरकार को PWD जैसे विभागों की कार्यप्रणाली में मूलभूत सुधार लाने की जरूरत है?

संक्षिप्त विवरण (25 शब्दों में):
छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण घोटाले का खुलासा, PWD के पांच अधिकारी गिरफ्तार, घटिया निर्माण और फर्जी बिलिंग में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप।

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