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10 दिन से आमरण अनशन, डीएड अभ्यर्थियों की हालत

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 3 January 2026

रायपुर में डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 10वें दिन भी जारी, कई बेहोश, 30 की हालत गंभीर, सरकार से जल्द समाधान की मांग।

रायपुर। डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। राजधानी रायपुर में अपनी मांगों को लेकर पिछले 10 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की तबीयत अब गंभीर रूप लेने लगी है। अनशन स्थल पर कई अभ्यर्थी कमजोरी के चलते बेहोश होकर गिर पड़े, जबकि लगभग 30 अभ्यर्थियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएड अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और लंबित मांगों के निराकरण की मांग कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण अभ्यर्थियों ने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया। आंदोलन के दसवें दिन अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखने को मिला।

अनशन स्थल पर मौजूद साथियों ने बताया कि कई अभ्यर्थियों को चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत हो रही है। कुछ अभ्यर्थियों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, वहीं कई को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक भूखे रहने के कारण अभ्यर्थियों के शरीर में शुगर और ब्लड प्रेशर का स्तर असामान्य हो गया है, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सरकार से कई बार संवाद की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा।

वहीं, मौके पर पहुंचे सामाजिक संगठनों और अभ्यर्थियों के परिजनों ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग की टीम को अनशन स्थल पर तैनात किया गया है और लगातार अभ्यर्थियों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। हालांकि, अब तक सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से आंदोलन समाप्त कराने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

लगातार बिगड़ती स्थिति के बीच डीएड अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर हालात में क्या निर्णय लेती है।

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