बिलासपुर में 2 माह का स्विमिंग शुल्क 1500, रायपुर में 1 माह का 2000, ठेका व्यवस्था पर सवाल, नागरिकों में बढ़ी नाराजगी।
रायपुर। रायपुर और बिलासपुर नगर निगमों के बीच सुविधाओं और शुल्क को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। जहां बिलासपुर में नगर निगम के स्विमिंग पूल का शुल्क बेहद किफायती है, वहीं रायपुर में यही सुविधा लोगों को महंगे दामों पर मिल रही है। इस अंतर ने नागरिकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिलासपुर में किफायती सुविधा
बिलासपुर नगर निगम द्वारा संचालित स्विमिंग पूल में दो महीने के लिए मात्र 1500 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। यह दर आम लोगों की पहुंच में है, जिससे बड़ी संख्या में युवा और बच्चे इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
रायपुर में महंगी व्यवस्था
वहीं, रायपुर में स्विमिंग पूल का संचालन ठेके पर दिया गया है। यहां एक महीने के लिए ही 2000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यानी, बिलासपुर की तुलना में रायपुर में शुल्क लगभग दोगुना से भी ज्यादा पड़ रहा है।
ठेका प्रणाली पर उठे सवाल
रायपुर में स्विमिंग पूल के निजी ठेके पर संचालन को लेकर लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि जब यह सुविधा नगर निगम के अंतर्गत आती है, तो शुल्क भी आम जनता के अनुकूल होना चाहिए। ठेकेदारी व्यवस्था के कारण कीमतें बढ़ रही हैं।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
शहर के युवाओं और अभिभावकों का कहना है कि इतनी महंगी फीस के कारण कई लोग स्विमिंग पूल का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। खासकर मध्यम वर्ग और छात्रों के लिए यह सुविधा लगभग पहुंच से बाहर हो गई है।
निगम प्रशासन का पक्ष
रायपुर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि स्विमिंग पूल के रखरखाव, साफ-सफाई, स्टाफ और अन्य खर्चों को देखते हुए शुल्क तय किया गया है। वहीं, बिलासपुर में अलग मॉडल के तहत संचालन हो रहा है, जिससे लागत कम पड़ रही है।
तुलना से बढ़ा दबाव
दोनों शहरों के बीच इस अंतर के सामने आने के बाद रायपुर नगर निगम पर दबाव बढ़ गया है कि वह शुल्क की समीक्षा करे। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बिलासपुर की तरह यहां भी दरें कम की जाएं।
विशेषज्ञों की राय
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक सुविधाओं का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि नागरिकों को सस्ती और सुलभ सेवाएं देना होना चाहिए। ऐसे में शुल्क निर्धारण में संतुलन जरूरी है।
निष्कर्ष
रायपुर और बिलासपुर के स्विमिंग पूल शुल्क में यह बड़ा अंतर प्रशासनिक नीतियों और संचालन व्यवस्था पर सवाल उठाता है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो लोगों की असंतुष्टि और बढ़ सकती है।
