सितंबर से बिजली बिल में छूट केवल 100 यूनिट तक मिलेगी, उसके बाद सामान्य दरें लागू होंगी। उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ, सरकार का तर्क- ऊर्जा बचत।
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के बिजली उपभोक्ताओं को सितंबर महीने से बड़ा बदलाव झेलना पड़ सकता है। अब तक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में मिलने वाली छूट का लाभ सीमित दायरे में मिलेगा। नई व्यवस्था के अनुसार, केवल 100 यूनिट तक की बिजली खपत पर ही छूट मिलेगी, जबकि इसके बाद का उपभोग सामान्य दरों पर जोड़ा जाएगा।
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यह फैसला ऊर्जा विभाग की ओर से बिजली वितरण और खपत को नियंत्रित करने के लिए लिया गया है। अब तक उपभोक्ताओं को अधिक यूनिट खपत पर भी रियायत मिल जाती थी, लेकिन बढ़ते लोड, उत्पादन लागत और सब्सिडी के दबाव के चलते सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया है।
उपभोक्ताओं पर असर
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जिनकी मासिक खपत 100 यूनिट से अधिक है। अब तक उन्हें अधिक यूनिट पर भी रियायती दरों का लाभ मिल जाता था। उदाहरण के लिए – यदि किसी उपभोक्ता का मासिक बिल 200 यूनिट का आता है, तो पहले 200 यूनिट तक सब्सिडी या छूट मिलती थी। लेकिन अब केवल 100 यूनिट तक ही छूट रहेगी और शेष 100 यूनिट पर पूरा बिल चुकाना होगा।
इससे छोटे और मध्यम आयवर्ग के परिवारों को अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा। वहीं, जिनकी खपत 100 यूनिट से कम रहती है, वे अब भी पूरी तरह से इस योजना का लाभ ले पाएंगे।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि ऊर्जा सब्सिडी पर भारी खर्च हो रहा है। राज्य सरकार हर साल हजारों करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खर्च कर रही है। बढ़ती मांग और बिजली उत्पादन की ऊँची लागत को देखते हुए अब इस नीति में बदलाव अनिवार्य हो गया था।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से लोग बिजली बचत और ऊर्जा संरक्षण की ओर प्रेरित होंगे। उपभोक्ताओं को गैर-जरूरी उपकरणों के इस्तेमाल को कम करने की आदत डालनी होगी।
विपक्ष और उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर विपक्ष और आम जनता में नाराजगी देखी जा रही है। विपक्षी दलों ने इसे आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने वाला निर्णय बताया है। उनका कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत पर इस तरह की पाबंदी गरीब और मध्यम वर्ग के लिए तकलीफदेह होगी।
वहीं, कई उपभोक्ता संगठनों ने भी इसका विरोध करते हुए सरकार से मांग की है कि सीमा को कम से कम 200 यूनिट तक बढ़ाया जाए, ताकि आम परिवारों को राहत मिल सके।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार बिजली बिल में छूट को 100 यूनिट तक ही सीमित करती है, तो इससे ऊर्जा खपत जरूर नियंत्रित होगी। हालांकि, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में खपत कम होती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अधिक।
आगे की स्थिति
सरकार की ओर से इस नई व्यवस्था का नोटिफिकेशन सितंबर से लागू होगा। फिलहाल, ऊर्जा विभाग इस पर जनता की प्रतिक्रिया पर भी नजर रखे हुए है। माना जा रहा है कि अगर विरोध ज्यादा बढ़ता है, तो सरकार सीमा को बढ़ाने पर विचार कर सकती है।
