नक्सल फंडिंग पर शिकंजा कसने के लिए अब ED भी ज्वाइंट एक्शन का हिस्सा, रायपुर में हुई उच्च स्तरीय बैठक में योजना तैयार।
नक्सली टेरर फंडिंग, ED नक्सली कार्रवाई, रायपुर बैठक ED, छत्तीसगढ़ नक्सल न्यूज, टेरर फाइनेंसिंग जांच, ज्वाइंट एक्शन फोर्स, नक्सल विरोधी रणनीति, ED की जांच कार्रवाई, टेरर फंडिंग नेटवर्क, छत्तीसगढ़ सुरक्षा एजेंसियां
Read it loud
रायपुर।छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब टेरर फंडिंग यानी नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क पर सीधा प्रहार करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा बनेगी।
रायपुर में बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने नक्सली फंडिंग को खत्म करने की रणनीति पर चर्चा की। यह पहली बार है जब ED को औपचारिक रूप से नक्सल विरोधी ज्वाइंट ऑपरेशन में शामिल किया गया है।
बैठक का उद्देश्य: फंडिंग चैनल तोड़ना
अब तक की नक्सल विरोधी कार्रवाइयों में ज्यादातर फोकस मुठभेड़ और सुरक्षा अभियानों पर रहा है। लेकिन अब नक्सल फंडिंग नेटवर्क को तोड़ने पर सीधा हमला किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि नक्सलियों की आर्थिक जड़ों को खत्म किए बिना आतंक को रोका नहीं जा सकता। इसमें हवाला लेन-देन, लेवी वसूली, और स्थानीय व्यापारियों से जबरन वसूली जैसे चैनलों की जांच की जाएगी।
प्रवर्तन निदेशालय की भूमिका
ED अब इस संयुक्त एक्शन प्लान का हिस्सा बनेगा और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) और फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत कार्य करेगा।
इसमें नक्सली समर्थक संस्थानों, एनजीओ, और फर्जी कंपनियों की फंडिंग की जांच की जाएगी, साथ ही संदिग्ध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी तेज होगी।
इन एजेंसियों ने लिया भाग
- प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- राज्य खुफिया विभाग
- छत्तीसगढ़ पुलिस
- सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी
- इन्कम टैक्स विभाग
- केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि
बैठक में फील्ड रिपोर्ट्स, ट्रांजैक्शन एनालिसिस, और संभावित संदिग्ध व्यक्तियों की सूची साझा की गई।
नक्सल फंडिंग के मुख्य स्रोत
- ग्रामीण व्यापारियों और ठेकेदारों से वसूली
- अवैध खनन और लकड़ी तस्करी
- फर्जी एनजीओ के माध्यम से विदेशी फंडिंग
- हवाला नेटवर्क के जरिए लेन-देन
- सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के जरिए हिस्सा
अब इन सभी स्रोतों को चिन्हित कर जांच शुरू की जाएगी।
ED की शुरुआती जांच में क्या आया सामने
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ जिलों में फर्जी कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से नक्सल फंडिंग हो रही है। इनके बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्ति को लेकर अब ईडी कार्रवाई करेगा।
पुलिस का बयान
IG ऑपरेशंस सुंदरराज पी. ने कहा –
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस कदम को लेकर सरकार ने इसे “रचनात्मक और ठोस पहल” बताया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा –
विपक्ष ने भी इस पर सहमति जताई है, लेकिन यह भी कहा कि कार्रवाई निष्पक्ष और जमीनी होनी चाहिए।
क्या होगा आगे का प्लान?
- नक्सली फंडिंग से जुड़ी 100 से अधिक संस्थाओं की जांच
- कम से कम 20 संदिग्ध लोगों की प्रॉपर्टी पर ईडी की नजर
- हवाला चैनलों पर कड़ी निगरानी
- जमीनी स्तर पर फील्ड इंटेलिजेंस को और मजबूत करना
- CRPF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई तेज करना
निष्कर्ष नहीं, लेकिन असर तय है
नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ बंदूकें नहीं, बल्कि उनके आर्थिक तंत्र को भी ध्वस्त करना होगा। ईडी की इस रणनीतिक भूमिका से यह साफ है कि अब लड़ाई सिर्फ जंगलों में नहीं, बैंक खातों और लेन-देन की फाइलों में भी लड़ी जाएगी।
