डूसू चुनाव 2025 में 73 वैध नामांकन मिले। 17 साल बाद अध्यक्ष पद की दौड़ में महिला प्रत्याशी, चुनावी मुकाबला रोमांचक और ऐतिहासिक होने की उम्मीद।
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2025 इस बार कई मायनों में खास माना जा रहा है। इस बार चुनाव में न केवल नामांकन का रिकॉर्ड टूटा है, बल्कि महिला नेतृत्व की संभावना ने पूरे चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना दिया है।
डूसू के चार प्रमुख पदों के लिए इस बार 50 से अधिक नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। सत्यापन के बाद कुल 73 नामांकन वैध पाए गए। इनमें सबसे अधिक 21 नामांकन अध्यक्ष पद के लिए दाखिल हुए हैं। सचिव पद के लिए 20, संयुक्त सचिव पद के लिए 17 और उपाध्यक्ष पद के लिए 15 नामांकन दाखिल हुए हैं। इतने अधिक नामांकन के कारण इस बार मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है।
17 साल बाद महिला नेतृत्व की संभावना
इस बार चुनाव का सबसे खास पहलू यह है कि 17 साल बाद अध्यक्ष पद की दौड़ में महिला प्रत्याशी सामने आई हैं। दो छात्र संगठनों ने महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिससे डूसू चुनावों में महिला नेतृत्व देखने की संभावना प्रबल हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अध्यक्ष पद पर बढ़ी टक्कर
अध्यक्ष पद पर 21 उम्मीदवार मैदान में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नामांकन का मतलब है कि छात्रों में इस बार चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्साह है। महिला प्रत्याशियों के मैदान में आने से अध्यक्ष पद का मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है।
सचिव और उपाध्यक्ष पद भी बने आकर्षण का केंद्र
सचिव पद के लिए 20 और उपाध्यक्ष पद के लिए 15 नामांकन दाखिल हुए हैं। छात्र संगठनों का मानना है कि इन दोनों पदों पर युवा छात्र-छात्राओं का भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वहीं संयुक्त सचिव पद के लिए 17 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं।
छात्र संगठनों की रणनीति
एबीवीपी, एनएसयूआई, आइसा और अन्य संगठनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को उतार दिया है। महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर संगठनों ने छात्रों के बीच नया संदेश देने की कोशिश की है। यह पहली बार है जब छात्र संगठनों ने महिला नेतृत्व को केंद्र में रखा है।
चुनावी उत्साह चरम पर
डूसू चुनाव हमेशा से दिल्ली विश्वविद्यालय की राजनीति का केंद्र रहे हैं। इस बार रिकॉर्ड नामांकन और महिला प्रत्याशियों की मौजूदगी से छात्रों के बीच चर्चा और उत्साह और बढ़ गया है। कैंपस में पोस्टर, बैनर और नारेबाजी से माहौल चुनावी रंग में रंग चुका है।
निष्कर्ष
डूसू चुनाव 2025 सिर्फ एक छात्र संघ का चुनाव नहीं, बल्कि यह आने वाले वर्षों की राजनीति का भी आईना साबित हो सकता है। महिला नेतृत्व का उभरना इस चुनाव को ऐतिहासिक बना रहा है। अब देखना यह होगा कि छात्र किस पर अपना भरोसा जताते हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय को अगला नेतृत्व कौन देता है।
