डीएसपी रागिनी मिश्रा को अनुसूचित जनजाति अधिकारों में योगदान के लिए 15 अगस्त को मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पुलिस सेवा में अनुशासित और प्रतिबद्ध भूमिका निभा रहीं डीएसपी रागिनी मिश्रा अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों की आवाज़ बनकर उभरी हैं। उनकी इस बहुमूल्य सेवा और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए 15 अगस्त को मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
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डीएसपी रागिनी मिश्रा ने जनजातीय इलाकों में काम करते हुए वहां के लोगों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परेशानियों को समझा और उनका समाधान निकालने के लिए कई पहल की। उन्होंने जनजाति समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए विशेष प्रयास किए।
उनकी अगुवाई में पुलिस विभाग ने कई योजनाएं शुरू कीं, जिनसे आदिवासी क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में सुधार देखने को मिला। डीएसपी मिश्रा की संवेदनशीलता और कर्मठता ने आदिवासी युवाओं में विश्वास पैदा किया है।
राज्य सरकार ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार से नवाजने का निर्णय लिया है। यह पुरस्कार उनकी मेहनत और समर्पण का प्रतीक है, जो अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए निरंतर काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डीएसपी रागिनी मिश्रा की तारीफ करते हुए कहा कि वे एक उदाहरण हैं कि कैसे प्रशासनिक अधिकारियों के समर्पण से सामाजिक बदलाव संभव है। उन्होंने आशा जताई कि उनकी यह पहल और मेहनत अन्य अधिकारियों को भी प्रेरित करेगी।
इस सम्मान समारोह में प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। डीएसपी मिश्रा की इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज को आत्मबल और प्रेरणा मिली है।
डीएसपी रागिनी मिश्रा ने अपने कार्यकाल में आदिवासियों के लिए शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने स्कूलों और युवा केंद्रों में विशेष ध्यान दिया ताकि युवा सशक्त होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें। साथ ही, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी उन्होंने कई अभियान चलाए।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे जनजाति समाज के लिए है। मैं आगे भी उनके विकास और सुरक्षा के लिए काम करती रहूंगी। उनका यह समर्पण पूरे राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
प्रदेश में अनुसूचित जनजाति समुदाय की भलाई और विकास के लिए पुलिस प्रशासन का यह योगदान सराहनीय है। डीएसपी रागिनी मिश्रा की पहल से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता और न्याय की भावना से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर डीएसपी रागिनी मिश्रा को मिलने वाला मुख्यमंत्री पुरस्कार छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय के अधिकारों और उनके विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
