शनिवार, 12 सितंबर 2026
ताज़ा खबर
Advertisement

पति से दूरी मानसिक क्रूरता, हाईकोर्ट ने तलाक मंजूर

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 4 September 2025

हाईकोर्ट ने माना कि पति द्वारा पत्नी से दूरी बनाना मानसिक क्रूरता है। तलाक मंजूर, SECL अधिकारी को 15 लाख गुजारा-भत्ता देना होगा।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैमिली लॉ मामला सुनाया, जिसमें पत्नी 10 साल से अपने मायके में रह रही थी। अदालत ने निर्णय दिया कि पति द्वारा बिना वजह पत्नी से दूरी बनाना मानसिक क्रूरता के अंतर्गत आता है और इसे तलाक का कारण माना जा सकता है।

मामला SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में कार्यरत अधिकारी और उनकी पत्नी का था। पत्नी ने दावा किया कि पति लगातार घरेलू संबंधों में दूरी बना रहे थे और मानसिक पीड़ा दे रहे थे। इसके चलते वह अपने मायके में रहने को मजबूर हो गई।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि पति की यह हरकत हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत मानसिक क्रूरता के अंतर्गत आती है। अदालत ने पति को पत्नी को तलाक देने का आदेश दिया और साथ ही 15 लाख रुपये गुजारा-भत्ता देने का भी निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी माना कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है। पति का लगातार भावनात्मक और मानसिक दुर्व्यवहार भी गंभीर अपराध माना गया।

इस फैसले से परिवार कानून में महिलाओं के अधिकारों को मजबूत किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय ऐसे मामलों में मिसाल बनेगा जहां महिलाएं मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही हों।

SECL अधिकारी को अब अदालत के आदेश का पालन करना होगा। इसे न मानने की स्थिति में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

वकीलों का मानना है कि यह मामला महिलाओं को यह संदेश देता है कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक क्रूरता भी गंभीर अपराध है।

संबंधित खबरें

अपनी प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version