मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि 2026 तक दिल्ली के गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के कूड़े के पहाड़ पूरी तरह खत्म होंगे, आधुनिक तकनीक से समाधान।
नई दिल्ली, दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या—कूड़े के पहाड़—जल्द ही इतिहास बनने वाली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि साल 2026 तक दिल्ली के तीनों कूड़े के पहाड़ पूरी तरह से खत्म कर दिए जाएंगे। सरकार ने इस दिशा में विशेष कार्ययोजना बनाई है और काम तेज़ गति से चल रहा है।
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गाजीपुर, भलस्वा और ओखला कूड़े के पहाड़ों पर फोकस
दिल्ली के गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट्स पर वर्षों से जमा कूड़े के पहाड़ राजधानी की छवि को धूमिल कर रहे हैं। न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण बल्कि आसपास रहने वाले लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। कई बार आग लगने और जहरीली गैसों के उत्सर्जन ने स्थिति को और भयावह बनाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह समस्या केवल दिल्ली की नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय रही है।
2026 तक खत्म करने की योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने एक टाइम-बाउंड एक्शन प्लान तैयार किया है। आधुनिक तकनीक की मदद से कूड़े को प्रोसेस कर बिजली और खाद बनाई जाएगी। RDF (Refuse Derived Fuel), C&D वेस्ट प्रोसेसिंग और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स की क्षमता बढ़ाई जा रही है। गुप्ता ने दावा किया कि इस काम को समयसीमा से पहले ही पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
केंद्र और नगर निगम का सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान में दिल्ली नगर निगम और केंद्र सरकार की भी अहम भूमिका होगी। केंद्र से वित्तीय सहयोग और विशेषज्ञता ली जाएगी। वहीं नगर निगम को आदेश दिया गया है कि कूड़े के नए ढेर न बनने पाएँ। इसके लिए स्रोत पर ही कचरे का विभाजन अनिवार्य किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों की समस्याएँ
गाजीपुर और भलस्वा इलाके के लोगों ने वर्षों से इस समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाई है। बारिश में सड़ने वाले कचरे से जहरीला पानी निकलकर नालों और ज़मीन के नीचे पहुँचता है, जिससे बीमारियाँ फैलती हैं। ओखला इलाके में भी प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता का विषय रहा है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इन इलाकों के निवासियों को सबसे पहले राहत दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस ऐलान पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले भी ऐसे वादे किए गए थे लेकिन जमीन पर नतीजे नहीं दिखे। विपक्ष ने मांग की कि सरकार इस योजना की प्रगति की मासिक रिपोर्ट जनता के सामने रखे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
विशेषज्ञों की राय
कचरा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ठोस रणनीति और आधुनिक तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो दिल्ली को कूड़े के पहाड़ों से छुटकारा दिलाना संभव है। हालांकि इसके लिए जनता का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। लोगों को घरों पर कचरे का विभाजन करने की आदत डालनी होगी।
2026 के बाद का विज़न
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिल्ली को कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में मॉडल सिटी बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 से दिल्ली पूरी तरह ‘जीरो वेस्ट सिटी’ की दिशा में कदम बढ़ाए। इसके लिए नई नीतियाँ, जन-जागरूकता अभियान और कठोर कानून लाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस ऐलान के बाद दिल्लीवासियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। अब देखना होगा कि सरकार अपने वादे पर कितना खरा उतरती है और क्या वाकई 2026 तक दिल्ली कूड़े के पहाड़ों से मुक्त हो पाएगी।
