बिलासपुर में निकली भव्य शोभायात्रा में करीब 5 हजार श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक झांकियों और जयघोष के बीच आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बिलासपुर। बिलासपुर शहर में आयोजित भव्य शोभायात्रा में आस्था, उत्साह और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस धार्मिक शोभायात्रा में करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और धार्मिक जयघोष के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे शहर का माहौल भक्तिमय कर दिया।
शोभायात्रा की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में धर्मध्वज और झांकियों के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरे। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर लोगों ने स्वागत किया। आकर्षक झांकियों में धार्मिक कथाओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। युवाओं की टोलियों ने भक्ति गीतों और नृत्य के माध्यम से वातावरण को और अधिक ऊर्जावान बना दिया। शोभायात्रा के शांतिपूर्ण और व्यवस्थित संचालन के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा, वहीं स्वयंसेवकों ने भी यातायात और भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई।
आयोजकों ने बताया कि शोभायात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर भाग लिया, जिससे आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश गया।
शोभायात्रा के समापन पर सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, प्रशासन और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसहभागिता के कारण यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा। कुल मिलाकर यह शोभायात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन रही, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक बनी।
