छत्तीसगढ़ के दो मेडिकल कॉलेजों में क्रिटिकल आईसीयू नहीं, 9 जिला अस्पताल बिना आईसीयू और 12 में सीटी स्कैन नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य के दो मेडिकल कॉलेजों में अब तक क्रिटिकल आईसीयू (Critical ICU) की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि 9 जिला अस्पताल ऐसे हैं जहां आईसीयू की व्यवस्था ही नहीं है। हालात यहीं तक सीमित नहीं हैं, प्रदेश के 12 जिला अस्पतालों में आज भी सीटी स्कैन मशीन मौजूद नहीं है, जिससे गंभीर मरीजों की जांच और इलाज में भारी परेशानी हो रही है।
मेडिकल कॉलेजों में भी अधूरी स्वास्थ्य सुविधाएं
राज्य में जिन मेडिकल कॉलेजों को उच्च स्तरीय इलाज का केंद्र माना जाता है, वहां भी बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय बन गई है। क्रिटिकल आईसीयू की अनुपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को बड़े शहरों या निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और जान दोनों का खतरा बढ़ जाता है।
जिला अस्पतालों की बदहाल स्थिति
ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों के मरीज जिला अस्पतालों पर ही निर्भर रहते हैं, लेकिन 9 जिलों में आईसीयू नहीं होने से गंभीर मरीजों का इलाज प्राथमिक स्तर तक ही सीमित रह जाता है। वहीं, 12 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन न होने से सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक, एक्सीडेंट और आंतरिक चोटों की समय पर पहचान नहीं हो पाती।
रेफरल सिस्टम पर बढ़ा दबाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीयू और सीटी स्कैन की कमी के कारण रेफरल सिस्टम पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। मरीजों को रायपुर, बिलासपुर या निजी अस्पतालों की ओर भेजा जा रहा है, जिससे सरकारी अस्पतालों की भूमिका कमजोर हो रही है और आम जनता पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई जिलों में नई मशीनों की खरीद और आईसीयू निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। बजट स्वीकृति, तकनीकी कारणों और स्टाफ की कमी के चलते काम में देरी हुई है, लेकिन आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से सवाल किए हैं कि जब स्वास्थ्य को प्राथमिकता बताया जाता है, तो फिर जिला स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी क्यों बनी हुई है। उनका कहना है कि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस क्रियान्वयन से ही हालात सुधरेंगे।
मरीजों की बढ़ती मुश्किलें
आईसीयू और सीटी स्कैन की कमी का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं या इलाज में देरी से स्थिति गंभीर हो जाती है।


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