हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि काउंसिलिंग पहले चरण से शुरू हो और एक माह में पूरी प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से संपन्न की जाए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा और स्पष्ट आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि काउंसिलिंग प्रक्रिया पहले चरण से ही शुरू की जाए और पूरे प्रवेश कार्य को एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। इस फैसले से हजारों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर चिंतित थे।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब छात्रों के भविष्य को प्रभावित करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन के कारण प्रवेश प्रक्रिया को टालना उचित नहीं है। इसलिए संबंधित विभाग और काउंसिलिंग एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि पहले चरण से ही पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से काउंसिलिंग शुरू की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि सभी चरणों की काउंसिलिंग, दस्तावेज सत्यापन, सीट आवंटन और अंतिम प्रवेश की प्रक्रिया अधिकतम एक महीने में पूरी होनी चाहिए। इसके लिए एक सख्त समय-सारिणी तैयार करने और उसी के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि समय सीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
दरअसल, विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और स्नातक-परास्नातक कोर्स में प्रवेश को लेकर छात्रों की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बार-बार नियम बदलने, चरणों में देरी और तकनीकी खामियों के कारण काउंसिलिंग प्रक्रिया लगातार लटक रही है, जिससे शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रवेश समिति से स्पष्ट पूछा कि आखिर देरी के पीछे क्या कारण हैं। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि कुछ तकनीकी सुधार और सीट मैट्रिक्स में बदलाव के कारण प्रक्रिया धीमी हुई। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासनिक कमियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि काउंसिलिंग की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए। सभी पात्र छात्रों को समान अवसर मिले और किसी भी स्तर पर भेदभाव या मनमानी न हो। साथ ही, हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्रों की समस्याओं का तत्काल समाधान हो सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से शैक्षणिक कैलेंडर पटरी पर लौट सकेगा। समय पर प्रवेश होने से कक्षाएं समय से शुरू होंगी और छात्रों का अकादमिक नुकसान रुकेगा। कई निजी और सरकारी कॉलेजों ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और तय समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
छात्र संगठनों ने कहा कि लंबे समय से वे इस तरह के आदेश की मांग कर रहे थे। अब उम्मीद है कि काउंसिलिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और सीटों की बर्बादी रुकेगी। साथ ही, समय पर प्रवेश होने से प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई की योजना बनाना भी आसान होगा।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा। जल्द ही विस्तृत काउंसिलिंग शेड्यूल जारी किया जाएगा, जिसमें सभी चरणों की तिथियां स्पष्ट रूप से बताई जाएंगी।





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